इस्राईली मीडिया ने लेबनान और इस्राईल के बीच हुए “फ्रेमवर्क एग्रीमेंट” की सफलता पर गंभीर संदेह जताया है। विभिन्न विश्लेषणों में कहा गया है कि इस समझौते को लागू करना आसान नहीं होगा और इसके सफल होने की संभावना कम दिखाई देती है।
इस्राईली अख़बार मआरीव ने लिखा कि यह समझौता “बिना दुल्हन के शादी” समान है। अख़बार के अनुसार यह समझौता इस्राईल को बहुत कम लाभ देता है और इसकी स्थिति “बर्फ पर लिखी इबारत” जैसी है, जो कभी भी मिट सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया कि समझौते की सफलता के लिए लेबनान के आंतरिक राजनीतिक मामलों, खासकर हिज़्बुल्लाह से जुड़े मुद्दों का समाधान ज़रूरी है, लेकिन फिलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा।
वहीं इस्राईल हयूम अख़बार ने बताया कि इस्राईल की सुरक्षा एजेंसियाँ इस समझौते का समर्थन तो कर रही हैं, लेकिन इसकी सफलता को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। अख़बार ने चेतावनी दी कि समझौते को लागू करने का रास्ता लंबा और कई बाधाओं से भरा हुआ है।
तल अवीव विश्वविद्यालय के मोशे दयान सेंटर के शोधकर्ता माइकल मिलश्टीन ने कहा कि यह कोई शांति समझौता नहीं है, बल्कि केवल एक सुरक्षा संबंधी दस्तावेज़ है। उनके अनुसार लेबनानी पक्ष भी इसे “शांति समझौता” कहने से बच रहा है।
इस्राईल की डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख याइर गोलान ने इस समझौते को “भ्रामक प्रदर्शन” बताया। उन्होंने कहा कि लेबनान सरकार के लिए इस समझौते की शर्तों को लागू करना मुश्किल होगा।
गौरतलब है कि पिछले शुक्रवार अमेरिका ने लेबनान और इस्राईल के बीच “फ्रेमवर्क एग्रीमेंट” होने की घोषणा की थी। इस्राईली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे तल अवीव की बड़ी उपलब्धि बताया, जबकि दक्षिणी लेबनान में इस्राईल की मौजूदगी जारी रखने की बात भी कही।
इस समझौते के खिलाफ लेबनान के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और प्रमुख हस्तियों ने इस समझौते का खुलकर विरोध किया है।

