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यमन ने ईरान का किया समर्थन, अमेरिका-इस्राईल को चेतावनी

सनआ: यमन की “परिवर्तन और निर्माण” सरकार के विदेश मंत्रालय ने ईरान के समर्थन में बयान जारी करते हुए कहा है कि ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी-इस्राईली कार्रवाइयाँ अपने उद्देश्यों में सफल नहीं होंगी और अंततः विफल साबित होंगी।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यमन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। मंत्रालय ने यह भी दावा किया कि क्षेत्र में जारी सैन्य तनाव और संघर्ष न केवल संबंधित पक्षों बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकते हैं।

बयान में कहा गया कि यमन “एकता के मोर्चों” की नीति के तहत ईरान के साथ खड़ा है और क्षेत्रीय घटनाक्रमों को लेकर लगातार समन्वय बनाए हुए है। मंत्रालय ने संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर उसके पास कई विकल्प मौजूद हैं, जिनका उपयोग किया जा सकता है।

इस बीच, ईरान की सेना की जनसंपर्क इकाई ने दावा किया है कि उसने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर ड्रोन हमले किए हैं। ईरानी सैन्य बयान के अनुसार, कुवैत में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों से जुड़े कुछ ठिकानों तथा रक्षा प्रणालियों को लक्ष्य बनाया गया।

ईरानी पक्ष ने यह भी दावा किया कि बहरीन में स्थित कुछ सैन्य संचार और रडार सुविधाओं पर भी ड्रोन हमले किए गए। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

ईरान की सेना ने चेतावनी देते हुए कहा कि क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता और उसके परिणामों की जिम्मेदारी उसके विरोधियों पर होगी। साथ ही, भविष्य में किसी भी नई कार्रवाई की स्थिति में अधिक कड़ी प्रतिक्रिया देने की बात कही गई है।

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और संभावित भू-राजनीतिक प्रभावों पर बनी हुई है।

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