नई दिल्ली: ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) की 16वीं बैठक के दौरान पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तीखा विवाद सामने आया। बैठक में ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने यूएई पर ऐसे आरोप लगाए, जिनसे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव खुलकर दिखाई दिया।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के उप सचिव क़दीर निज़ामीपूर ने कहा कि ईरान के खिलाफ हुए सैन्य अभियानों में अमेरिका और इस्राईल को क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग मिला था और इसमें यूएई की भूमिका भी शामिल थी।
क़दीर निज़ामीपूर ने आरोप लगाया कि हुर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में शुरू हुई सैन्य कार्रवाई के दौरान यूएई ने न केवल हमलों की निंदा करने से परहेज किया, बल्कि अपनी भूमि और सुविधाओं के इस्तेमाल की भी अनुमति दी। उनके अनुसार, इन अभियानों के दौरान ईरान के नागरिक प्रतिष्ठानों, स्कूलों और अस्पतालों को भी निशाना बनाया गया।
बैठक के बाद भारत स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि ईरानी प्रतिनिधि ने यूएई के उन आरोपों का कड़ा जवाब दिया, जिनमें पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया गया था। तेहरान ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया।
दूसरी ओर, यूएई की ओर से बैठक में प्रस्तुत विचारों में क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा पर जोर दिया गया। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच हुई तीखी बयानबाजी ने बैठक के माहौल को कुछ समय के लिए तनावपूर्ण बना दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और हालिया संघर्षों के कारण क्षेत्रीय देशों के बीच अविश्वास बढ़ा है। नई दिल्ली में हुई यह बहस इसी व्यापक तनाव की झलक मानी जा रही है।
ब्रिक्स NSA बैठक में सदस्य देशों के प्रतिनिधि आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, उभरती सुरक्षा चुनौतियों और क्षेत्रीय संघर्षों जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। ऐसे में ईरान और यूएई के बीच सामने आया यह विवाद बैठक के सबसे चर्चित घटनाक्रमों में से एक बन गया।

