तल अवीव : एक हिब्रू मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस्राईल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अंतरराष्ट्रीय स्थिति बेहद कमजोर हो गई है और वह दुनिया के 125 देशों की यात्रा नहीं कर सकते, क्योंकि ये देश अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) के सदस्य हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस्राईल मीडिया ज़मान यिसराइल ने अपने विश्लेषण में कहा है कि दुनिया में इस्राईल के संबंध इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। रिपोर्ट में इसके लिए गाज़ा, वेस्ट बैंक और ईरान को लेकर इस्राईली सरकार की नीतियों के साथ-साथ नेतन्याहू की अमेरिकी राजनीति में भूमिका को भी जिम्मेदार बताया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नेतन्याहू और उनके समर्थक इस्राईल की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को मजबूत बताते हैं, लेकिन विभिन्न सर्वेक्षण और कूटनीतिक घटनाक्रम इसके विपरीत तस्वीर पेश करते हैं। कई पश्चिमी देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता दी है, जबकि यूरोपीय संघ इस्राईल के साथ व्यापार समझौते पर पुनर्विचार कर रहा है। वहीं, सऊदी अरब के साथ संभावित सामान्यीकरण भी अभी तक आगे नहीं बढ़ सका है।
रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2024 में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। उन पर गाज़ा युद्ध के दौरान भूख को युद्ध के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने, हत्या, उत्पीड़न और अमानवीय कृत्यों जैसे आरोप लगाए गए हैं।
इस्राईल इन आरोपों को खारिज करता है, लेकिन हिब्रू मीडिया के अनुसार गिरफ्तारी वारंट ने नेतन्याहू की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। रिपोर्ट का दावा है कि ICC के सदस्य देशों को अपने क्षेत्र में प्रवेश करने पर वारंट के तहत कार्रवाई करनी पड़ सकती है।
इसी वजह से फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और कनाडा जैसे इस्राईल के करीबी पश्चिमी देशों की यात्रा भी नेतन्याहू के लिए जोखिमपूर्ण हो गई है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए जाते समय नेतन्याहू के विशेष विमान ने फ्रांस और स्पेन के हवाई क्षेत्र से बचते हुए वैकल्पिक मार्ग अपनाया, जिससे उड़ान का रास्ता लगभग 600 किलोमीटर बढ़ गया।
रिपोर्ट के मुताबिक नेतन्याहू ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच में भी हिस्सा नहीं लिया, क्योंकि स्विट्जरलैंड ICC का सदस्य है और उन्हें गिरफ्तारी का डर था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नेतन्याहू फिलहाल उन करीब 70 देशों की यात्रा कर सकते हैं जो ICC के सदस्य नहीं हैं। लेकिन इनमें से कई देशों के इस्राईल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं या बेहद ठंडे हैं।
ICC का गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद नेतन्याहू ने अप्रैल 2025 में हंगरी की यात्रा की थी। रिपोर्ट के अनुसार, हंगरी ने उस समय उन्हें गिरफ्तार नहीं किया। बाद में हंगरी की सरकार ने ICC से बाहर निकलने की घोषणा की, हालांकि यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और नई सरकार ने उस फैसले को वापस लेते हुए ICC के आदेशों का पालन करने की प्रतिबद्धता जताई।
रिपोर्ट में पोलैंड और अर्जेंटीना का भी उल्लेख किया गया है, जिन्होंने नेतन्याहू के प्रति समर्थन के संकेत दिए थे, लेकिन उन्होंने अंततः इन देशों की यात्रा नहीं की।
हिब्रू मीडिया के विश्लेषण में कहा गया है कि 7 अक्टूबर के बाद पश्चिमी देशों में शुरुआत में इस्राईल को व्यापक समर्थन मिला था, लेकिन गाज़ा में लंबे समय तक जारी युद्ध और बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत के कारण अंतरराष्ट्रीय जनमत में बदलाव आया।
रिपोर्ट के अनुसार, गाज़ा में मानवीय संकट की तस्वीरों और युद्ध में नागरिकों की मौतों ने दुनिया भर में इस्राईल के प्रति समर्थन को कमजोर किया है।
रिपोर्ट में मार्च 2026 में ईरान के खिलाफ हुए युद्ध का भी उल्लेख किया गया है। हिब्रू मीडिया के अनुसार, इस युद्ध ने दुनिया के कई हिस्सों में इस्राईल के प्रति नाराज़गी को और बढ़ा दिया।
रिपोर्ट का दावा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का अधिकांश विश्व जनमत ने विरोध किया, यहां तक कि वे देश भी इससे सहमत नहीं थे जो ईरानी सरकार के आलोचक हैं।
हिब्रू मीडिया के अनुसार, युद्ध किसी निर्णायक परिणाम के बिना समाप्त हुआ और इसके बाद हुर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकाबंदी, वैश्विक तेल कीमतों में उछाल और कूटनीतिक गतिरोध जैसी स्थितियां पैदा हुईं।
रिपोर्ट के अनुसार, यदि इस्राईली प्रधानमंत्री दुनिया के अधिकांश देशों और अपने कई प्रमुख पश्चिमी सहयोगी देशों की यात्रा नहीं कर सकते, तो इसे मजबूत अंतरराष्ट्रीय स्थिति नहीं बल्कि बढ़ते अंतरराष्ट्रीय अलगाव के रूप में देखा जाना चाहिए।
गाज़ा और ईरान से जुड़ी इस्राईल की नीतियों ने उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि और कूटनीतिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

