रॉयटर्स के अनुसार, मामले से जुड़े छह जानकार सूत्रों ने बताया है कि चीन ने अपने तेल टैंकरों की दक्षिणी लाल सागर से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए यमन के साथ सीधे बातचीत की है। यह कदम उस घोषणा के बाद उठाया गया, जिसमें यमन ने सऊदी अरब के बंदरगाहों तक पहुंच को बाधित करने का संकल्प लिया था।
रॉयटर्स के मुताबिक, यमन ने 20 जुलाई को इस नाकेबंदी की घोषणा की थी और इसके साथ ही अमेरिका तथा उसके सहयोगियों के खिलाफ एक नया मोर्चा खोल दिया।
सूत्रों के अनुसार, बीजिंग ने सीधे यमन से अनुरोध किया है कि वह चीनी तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही की गारंटी दे।
जानकार सूत्रों का कहना है कि चीन प्रत्येक जहाज के लिए अलग-अलग आधार पर यमन से पारगमन की अनुमति प्राप्त करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग सऊदी अरब के लाल सागर स्थित तेल निर्यात टर्मिनलों, विशेष रूप से यनबू बंदरगाह से तेल निर्यात का प्रवाह बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, ताकि ईरान द्वारा फारस की खाड़ी के निकास पर स्थित हुर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद किए जाने से उत्पन्न आपूर्ति संकट की भरपाई की जा सके।
इस बीच, यमन पहले ही घोषणा कर चुका है कि वह सऊदी अरब के खिलाफ “नाकेबंदी के बदले नाकेबंदी” की रणनीति लागू कर रहा है। यमन का कहना है कि इसका उद्देश्य रियाद द्वारा वर्षों से लगाए गए प्रतिबंधों और नाकेबंदी को समाप्त कराना है।
समुद्री व्यापार से जुड़ी विशेषज्ञ पत्रिका लॉयड्स लिस्ट ने इससे पहले बताया था कि लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग पूरी तरह रुक गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 23 जुलाई से अब तक इस मार्ग पर कच्चा तेल ले जाने वाले किसी भी सऊदी टैंकर का पंजीकरण दर्ज नहीं किया गया है।
पत्रिका ने दावा किया कि यमन द्वारा समुद्री नाकेबंदी की घोषणा के बाद सऊदी अरब के यनबू बंदरगाह के पास कम-से-कम 11 तेल टैंकरों ने अपने ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर दिए हैं।

