तल अवीव : इस्राईल की एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कतर ने अपनी हिस्सेदारी का इस्तेमाल करते हुए जर्मनी की ऑटोमोबाइल कंपनी फॉक्सवैगन और इस्राईली रक्षा कंपनी राफेल के बीच होने वाली एक बड़ी रक्षा परियोजना को रोक दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, कतर के सॉवरेन वेल्थ फंड के पास फॉक्सवैगन में लगभग 17 प्रतिशत वोटिंग अधिकार हैं। इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए उसने जर्मनी में राफेल के साथ प्रस्तावित सैन्य उत्पादन समझौते को मंजूरी देने से इनकार कर दिया।
बताया गया कि यह परियोजना जर्मनी के ओसनाब्रुक स्थित फॉक्सवैगन के पुराने कारखाने से जुड़ी थी। वित्तीय संकट से जूझ रहे इस प्लांट को रक्षा उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने की योजना थी। यहां आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम के इंजन और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों के निर्माण का प्रस्ताव था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कतर के इस फैसले को फॉक्सवैगन प्रबंधन और जर्मन सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दोनों इस परियोजना को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मान रहे थे।
इस घटनाक्रम के बाद यूरोप के कुछ विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है कि महाद्वीप के बड़े औद्योगिक संस्थानों में खाड़ी देशों की पूंजी का बढ़ता प्रभाव भविष्य में महत्वपूर्ण फैसलों को प्रभावित कर सकता है।
वहीं, इस्राईली मीडिया का दावा है कि जर्मनी में बातचीत विफल होने के बाद राफेल अब भारत की रक्षा कंपनियों के साथ उन्नत स्तर की बातचीत कर रही है। कंपनी भारत में मिसाइल इंटरसेप्टर और अन्य रक्षा उपकरणों के उत्पादन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तलाश रही है।

