बगदाद : आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध प्रभावी भूमिका निभाने वाले समूह हश्दुश-शअबी के सूचना विभाग के प्रमुख मुहनद अल-अक़ाबी ने देश की सुरक्षा और प्रतिरोधी समूहों की स्थिति पर बात करते हुए कहा कि इराक ने अमेरिकी सेना, अल-कायदा और ISIS के कब्जे जैसे कठिन दौर देखे हैं। इन हालात की वजह से अलग-अलग समय में देश में सशस्त्र समूह भी सामने आए।
उन्होंने कहा कि आम तौर पर हम इन मुद्दों को वैज्ञानिक तरीके से देखते हैं, लेकिन कभी-कभी किसी सशस्त्र समूह को राष्ट्रीय मूल्य और प्रतिरोधी संगठन के रूप में भी देखा जाना चाहिए।
अल-अक़ाबी के अनुसार, हश्दुश-शअबी के गठन की मुख्य वजह वरिष्ठ धार्मिक नेता आयतुल्लाह सय्यद अली सीस्तानी का फतवा था। उन्होंने कहा कि हश्दुश-शअबी की शुरुआती और मुख्य ताकत प्रतिरोधी समूह थे।
उन्होंने बताया कि फतवा जारी होने से पहले प्रतिरोधी समूह हाज अबू महदी अल-मुहंदिस के घर पर इकट्ठा हुए थे। बैठक के बाद धार्मिक नेतृत्व की ओर से फतवा जारी किया गया।
फतवे के बाद बड़ी संख्या में लोग स्वयंसेवक के रूप में सामने आए। उनमें से कुछ लोगों को हथियार चलाने का पहले कोई अनुभव भी नहीं था, लेकिन देश की रक्षा में भाग लेने की इच्छा के कारण वे हश्दुश-शअबी में शामिल हो गए।
उन्होंने कहा कि हश्दुश-शअबी की बुनियाद प्रतिरोधी समूहों पर थी और इसके कई कमांडर पहले से ही इन समूहों के साथ जुड़े हुए थे। हालांकि, समय के साथ हश्दुश-शअबी एक सरकारी संस्था में बदल गई, जो सरकारी आदेशों और नियमों के अनुसार काम करती है।
अल-अक़ाबी ने कहा कि देश के हित में कानून, एक निश्चित व्यवस्था और अनुशासित सैन्य बल जरूरी हैं, जो एक झंडे और एकीकृत कमान के तहत काम करें।
उन्होंने आगे कहा कि हश्दुश-शअबी की जिम्मेदारी इराकी सरकार और राजनीतिक प्रक्रिया की रक्षा करना है। उनके अनुसार, संगठन के लिए देश का हित सबसे महत्वपूर्ण है और वे किसी खास व्यक्ति, व्यक्तिगत पसंद या किसी विशेष परिस्थिति के आधार पर काम नहीं करते।
उन्होंने हश्दुश-शअबी की संरचना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संगठन में ईज़दी, ईसाई, कुर्द, शिया और सुन्नी सभी शामिल हैं और इसने विभिन्न समुदायों को एक संगठन के अंदर एक साथ लाया है।
हाल में हश्दुश-शअबी के ठिकानों पर हुए हमलों के बारे में अल-अक़ाबी ने कहा कि इन ठिकानों को निशाना बनाना हास्यास्पद था। उनके अनुसार, असली अपराधी और हत्यारों के मूल मुद्दे पर ध्यान देने के बजाय बहस इस बात पर पहुंच गई कि हश्दुश-शअबी को इस घटना की जानकारी थी या नहीं।
उन्होंने कहा कि हश्दुश-शअबी ने हमेशा खुद को इराकी सेना और पुलिस के समर्थन और मदद करने वाली ताकत के रूप में पेश किया है। उन्होंने दावा किया कि संगठन ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं, ISIS को हराने में भूमिका निभाई है और बड़ी संख्या में शहीद दिए हैं। संगठन के कई वरिष्ठ कमांडर भी मारे गए।
अल-अक़ाबी ने साफ शब्दों में कहा: “हम अमेरिका के अधीन कोई राज्य या प्रांत नहीं हैं और हम वह नहीं करते जो अमेरिका चाहता है।”
उन्होंने कहा कि इराक क्षेत्र में समझौते कराने और स्थिरता कायम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा कि हश्दुश-शअबी लगातार हालात पर नजर रखे है और हर समय तैयार है। उनके अनुसार, यह संगठन सरकार और राज्य के कानूनी ढांचे के अंदर रहकर काम करता है।
अंत में ईरान की भूमिका के बारे में अल-अक़ाबी ने कहा कि अगर इस्लामी गणराज्य ईरान नहीं होता, तो इराक में सुरक्षा व्यवस्था मौजूद नहीं होती।”

