अबू धाबी: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अपनी हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूएई ने रूस के अत्याधुनिक S-400 लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम को खरीदने पर सहमति जताई है। बताया जा रहा है कि यह सौदा रूस, तुर्की और यूएई के बीच हुए एक त्रिपक्षीय समझौते के तहत होगा, जबकि इस प्रक्रिया को अमेरिका की मंजूरी भी मिल चुकी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते के बाद तुर्की के लिए अमेरिका से F-35 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान खरीदने का रास्ता फिर से खुल सकता है। तुर्की ने पहले रूस से S-400 खरीदने के कारण F-35 कार्यक्रम में अपनी भागीदारी खो दी थी। ऐसे में यह नया समझौता दोनों देशों के रक्षा संबंधों में नई संभावनाएं पैदा कर सकता है।
यूएई के लिए S-400 की खरीद ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां बढ़ी हुई हैं। हाल के महीनों में ईरान और क्षेत्रीय तनाव के कारण खाड़ी देशों की सुरक्षा पर लगातार दबाव बना है। ऐसे में लंबी दूरी तक निगरानी और मिसाइल रोकने में सक्षम S-400 सिस्टम यूएई की रक्षा क्षमता को मजबूत कर सकता है।
यूएई के पास पहले से ही कई उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं। इनमें अमेरिकी थाड, पैट्रियट PAC-3, दक्षिण कोरिया का KM-SAM और रूस का Pantsir एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। अब S-400 के जुड़ने से देश का इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस नेटवर्क और अधिक प्रभावी हो जाएगा।
S-400 दुनिया के सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम में गिना जाता है। यह लंबी दूरी से आने वाले लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों, ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक कर उन्हें निशाना बनाने में सक्षम माना जाता है। इसकी तैनाती से यूएई के सुरक्षित हवाई क्षेत्र का दायरा भी पहले की तुलना में काफी बढ़ जाएगा।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस बड़े पैमाने पर S-400 इंटरसेप्टर मिसाइलों का उत्पादन करने की क्षमता रखता है। इससे किसी संघर्ष की स्थिति में इस्तेमाल हो चुकी मिसाइलों की तेजी से भरपाई संभव हो सकती है। वहीं, कुछ विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी पैट्रियट और थाड सिस्टम के लिए इंटरसेप्टर मिसाइलों की उपलब्धता और उत्पादन की गति अपेक्षाकृत सीमित रही है।
गौरतलब है कि भारत भी अपनी वायु रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए रूस से खरीदे गए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का संचालन कर रहा है। इस सिस्टम को लंबी दूरी तक दुश्मन के हवाई खतरों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता के लिए दुनिया के सबसे प्रभावी एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म में शामिल किया जाता है।

