अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान ने वाशिंगटन को कड़ा संदेश दिया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालीबाफ ने कहा कि धमकी, दबाव और जबरन फैसले थोपने का समय अब खत्म हो चुका है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान किसी भी कीमत पर झुकने वाला नहीं है।
क़ालीबाफ ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अमेरिकी प्रशासन पर कई आरोप लगाए। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच हुए समझौतों की भावना को अमेरिका ने कई बार नुकसान पहुंचाया है।
ईरानी संसद अध्यक्ष ने जिन मुद्दों का जिक्र किया, उनमें हुर्मुज क्षेत्र से जुड़े समझौतों का उल्लंघन, आगे भी हमले की धमकियां, तेल प्रतिबंधों को दोबारा लागू करना, दक्षिणी ईरान में सैन्य कार्रवाई और क्षेत्र में इस्राईल से जुड़े हमलों को समर्थन देने जैसे आरोप शामिल हैं।
क़ालीबाफ ने कहा कि ईरान पर दबाव बनाकर कोई समाधान हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने दोहराया कि उनका देश किसी बाहरी दबाव के आगे आत्मसमर्पण नहीं करेगा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर बड़े सैन्य अभियान का दावा किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, 7 जुलाई को किए गए हमलों में ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की समुद्री और सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई में ईरानी कमांड नेटवर्क, एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय रडार स्टेशन, एंटी-शिप मिसाइल ठिकाने और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कई छोटी नौकाओं को निशाना बनाया गया।
ईरान के कड़े बयान और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि दोनों देश आगे बातचीत का रास्ता चुनते हैं या फिर टकराव और गहरा होता है।

