दमिश्क: सीरिया की स्वयंभू सरकार के विदेश मंत्री असद अल-शैबानी ने स्वीकार किया है कि दमिश्क ने इस्राईल के साथ बातचीत के दरवाजे बंद नहीं किए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच सीमा पर तनाव कम करने और सुरक्षा संबंधी समझौते तक पहुंचने के लिए बातचीत दोबारा शुरू की जा सकती है।
असद अल-शैबानी ने अमेरिकी समाचार वेबसाइट “एक्सियोस” से बातचीत में कहा कि अमेरिका की मध्यस्थता के जरिए इस्राईल के साथ सुरक्षा समझौते को लेकर हुई वार्ताओं में महत्वपूर्ण प्रगति हुई थी, लेकिन बाद में तल अवीव पीछे हट गया।
उन्होंने कहा कि यदि वॉशिंगटन की मध्यस्थता से बातचीत दोबारा शुरू होती है, तो दोनों पक्ष ऐसे समझौते और आपसी समझ विकसित कर सकते हैं, जिनसे सीरिया और इस्राईल दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
जौलानी के विदेश मंत्री शैबानी ने कहा कि सीमा पर तनाव कम करना केवल एक पक्ष की जिम्मेदारी नहीं है। उसके मुताबिक, इस्राईल को सीरिया के प्रति अपनी नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि सीरिया की सरकार अब भी इस्राईल के साथ ऐसा समझौता करने में रुचि रखती है, जिससे सीमा पर तनाव कम किया जा सके। हालांकि, उन्होंने साथ ही आरोप लगाया कि इस्राईल की मौजूदा नीति सीरिया या पूरे क्षेत्र में स्थिरता लाने में मदद नहीं कर रही है।
शैबानी के बयान संकेत मिलता है कि दमिश्क सैन्य तनाव और सीमा पर बढ़ती अस्थिरता के बावजूद इस्राईल के साथ बातचीत का विकल्प खुला रखना चाहता है। सीरियाई सरकार का जोर फिलहाल तनाव कम करने और सीमा पर किसी बड़े टकराव को रोकने के लिए कूटनीतिक रास्ता तलाशने पर दिखाई देता है।
इस बीच, सीरियाई विदेश मंत्री ने सीरिया के इदलिब में स्थित अल-ज़ुहूर सैन्य हवाई अड्डे पर हालिया इस्राईली हमले को लेकर भी प्रतिक्रिया दी।
हालांकि, इस हमले के संबंध में उनका बयान काफी सीमित और अस्पष्ट रहा। शैबानी ने कहा कि इस्राईली हमले के बाद सीरियाई सरकार ने ट्रंप प्रशासन और कई अन्य देशों से संपर्क किया, ताकि हमले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया जा सके और भविष्य में इस तरह की कार्रवाई को दोहराए जाने से रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि दमिश्क ने वॉशिंगटन को स्पष्ट रूप से यह भी बताया है कि वह सीरिया के संबंध में इस्राईल की मंशा पर भरोसा नहीं करता।
सीरियाई विदेश मंत्री के मुताबिक, दमिश्क सीमा पर तनाव कम करने के लिए समझौते का इच्छुक है, लेकिन इसके लिए इस्राईल को भी अपनी नीति में बदलाव करना होगा। उनका कहना है कि लगातार सैन्य दबाव और हमलों से सीरिया में स्थिरता स्थापित करने और क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत करने में मदद नहीं मिल रही है।

