सनआ: यमन के लोकप्रिय जनांदोलन अंसारुल्लाह ने सऊदी अरब पर अमेरिका और इस्राईल के हितों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। संगठन के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-फरह ने कहा कि रियाज़ लगातार ऐसी नीतियां अपना रहा है, जो क्षेत्र में अमेरिकी और इस्राईल की रणनीति के अनुरूप हैं।
यमनी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अल-फरह ने कहा कि सऊदी अरब अपने राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल अमेरिका की क्षेत्रीय योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए कर रहा है। उनका आरोप है कि रियाज़ उन देशों और समूहों को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है, जो इस्राईल विरोधी रुख रखते हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी अपने बयान में अल-फरह ने कहा कि सऊदी अरब यमन के साथ एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र की तरह व्यवहार नहीं करता। उन्होंने आरोप लगाया कि रियाज़ अब भी यमन को अपने प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा मानता है, जो यमनी जनता की संप्रभुता और सम्मान के खिलाफ है।
अंसारुल्लाह नेता ने दावा किया कि वर्षों से जारी सैन्य कार्रवाई और राजनीतिक-आर्थिक नाकेबंदी के बावजूद सऊदी अरब अब यमन संकट में अपनी भूमिका से दूरी बनाने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार, वास्तविक समाधान तभी संभव है जब सैन्य कार्रवाई समाप्त हो, नाकेबंदी हटाई जाए और यमन की संप्रभुता का सम्मान किया जाए।
अल-फरह ने कहा कि यमन के लोगों के अधिकारों और सम्मान की अनदेखी राष्ट्रीय गरिमा पर हमला है। उन्होंने कहा कि यमन की जनता और आधिकारिक संस्थानों का विरोध यह दर्शाता है कि देश अपनी संप्रभुता और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
अंसारुल्लाह के वरिष्ठ नेता ने कहा कि यमन की सशस्त्र सेनाएं पूरी तरह तैयार हैं और आने वाले समय में जमीनी स्तर पर नए घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उनका संगठन अपने लक्ष्यों को हासिल करेगा और सऊदी अरब को अपनी नीतियों के परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

