इस्राईल ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) की ग़ज़्ज़ा पर जारी रिपोर्ट को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। इस्राईल ने आरोप लगाया है कि यह रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित नहीं है और इसमें ज़ायोनी रक्षा बलों (IDF) के खिलाफ “बिना आधार के” दावे किए गए हैं। इस्राईल का कहना है कि यह रिपोर्ट हमास के साथ मिलकर तैयार की गई है।
यह विवाद उस स्वतंत्र जांच आयोग (Independent International Commission of Inquiry – CoI) की रिपोर्ट से जुड़ा है, जो पूर्वी यरुशलम और
मक़बूज़ा फिलिस्तीनी क्षेत्रों में मानवाधिकार स्थिति की जांच कर रहा था। इस आयोग में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस. मुरलीधर भी सदस्य हैं।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इस्राईल की सेना ने ग़ज़्ज़ा में अपनी कार्रवाइयों के दौरान फिलिस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाया। इस निष्कर्ष ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी बहस को जन्म दिया है।
इस्राईल ने इन दावों को सख्ती से खारिज करते हुए कहा है कि IDF पर लगाए गए आरोप “पूरी तरह बेबुनियाद” हैं। भारत में इस्राईल
के राजदूत रूवेन अजार ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर प्रतिक्रिया देते हुए जस्टिस मुरलीधर के बयानों की आलोचना की है। उन्होंने 7 अक्टूबर के हमास हमले का जिक्र करते हुए कहा कि उस हमले में नागरिकों की हत्या, बंधक बनाना और अत्याचार जैसी घटनाएँ शामिल थीं।
इस्राईल ने यह भी दावा किया है कि CoI ने लाखों डॉलर खर्च कर ऐसी रिपोर्ट तैयार की है जिसमें उसके सैनिकों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिन्हें वह पूरी तरह अस्वीकार करता है।
इस पूरे मामले ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और मानवाधिकार जांच प्रक्रियाओं को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

