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इस्राईल से संबंध सामान्य करने वाले अरब देशों के अब्दुल्लाह अशअल ने गिनाए दस बड़े अपराध

अब्दुल्लाह अशअल फिलिस्तीन के वरिष्ठ अधिवक्ता, बुद्धिजीवी, लेखक तथा विदेश मंत्रालय में बड़ी ज़िम्मेदारी से लेकर दूत तक के पद पर तैनात रह चुके। अब्दुल्लाह ने अरब इस्राईल संबंधों के सामान्य होने के दूसरे दौर के अवसर पर कहा कि मुस्लिम जगत की पीठ में खंजर घोंप कर इस्राईल से संबंध सामान्य करने वाले अरब देशों ने इस्राईल को मान्यता देकर दस अहम् अपराध किए हैं।
अब्दुल्लाह ने कहा कि अनवर सादात के युग में मिस्र इस्राईल की निकटता के समय से ही कहा जा रहा है कि यह संबंध मिस्र के लिए बहुत लाभकारी होंगे मीडिल ईस्ट की सूरत बदल जाएगी लेकिन क्या हुआ ?
मिस्र ने इस्लामी उम्माह को इस्राईल जैसे कैंसर के सामने घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया फिर जॉर्डन नरेश और यासिर अराफात भी कैंप डेविड, ओस्लो और वादी ए अरबा वार्ता के रूप में इस्राईल के आगे नतमस्तक हो गए। दूसरे दौर में संयुक्त अरब अमीरात , बहरैन , सूडान, और मोरक्को भी इस्राईल के साथ हाथ मिला चुके हैं।
इस्राईल को मान्यता देने वालों ने बहुत से धार्मिक एवं राजनैतिक एवं नैतिक अपराध किए हैं।
पहला : उन्होंने अतिक्रमणकारी एवं क़ातिलों को पीड़ितों और मज़लूमों के विरुद्ध समर्थन दिया।
दूसरा : उन्होंने पूरी फिलिस्तीनी भूमि पर इस्राईल को मान्यता दे दी अब अरब होने के ढोंग से पीछा छुड़ाएं।
तीसरा : उन्होंने क़ुद्स और मस्जिदे अक़्सा को इस्राईल के हाथों में सौंप दिया। मस्जिदे अक़्सा को छोड़ बैठे और इस काम से न खुदा राज़ी है न अल्लाह।
चौथा : उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन किया।
पांचवां : उन्होंने खाड़ी सहयोग परिषद और अरब लीग के संकल्पों और प्रस्तावों का विरोध किया।
छठा : वह अवसर वादी है और उन्होंने एक नैतिक अपराध किया है । इस्राईल को मान्यता देना अपने देश की जनता के साथ धोखा है। यह देश की जनता के हितों के विपरीत है।
सातवां : इस्राईल को मान्यता देना फिलिस्तीन के साथ विश्वासघात एवं इस्लाम दुश्मन शक्तियों को मज़बूत करना है तथा इस्राईल के खिलाफ प्रतिरोध को कमज़ोर करना है ताकि फिलिस्तीन की जनता मायूस हो जाए और इस्राईल पूरे क्षेत्र पर क़ाबिज़ हो जाए।
आठवां : फिलिस्तीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और इस्राईल के हितों के लिए काम करना।
नौवां : इस्राईल के साथ संबंध सामान्य करने वालों का प्रतिरोधी मोर्चे के खिलाफ शत्रुतापूर्ण व्यवहार और अरब देशों की दौलत से इस्लाम दुश्मन ताक़तों की सहायता और इस्लामी उम्मत को दुश्मन के आगे क़ुर्बान होने के लिए छोड़ देना।
दसवां : इस्राईल को इन अरब देशों की ओर से मान्यता देना तथा तल अवीव से संबंध बढ़ाना फिलिस्तीन के खिलाफ उसके अत्याचार और फिलिस्तीनी भूमि पर अवैध आवासीय इकाईयों के निर्माण और जनसंहार को हरी झंडी देने के समान है।

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