इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में ओडिशा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और यूएन स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग के चेयरमैन जस्टिस एस. मुरलीधर ने भारत सरकार की विदेश नीति को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार को अपनी विदेश नीति पर फिर से विचार करना चाहिए और यह सोचना चाहिए कि क्या हम मानवता के बुनियादी सिद्धांतों को नजरअंदाज कर सकते हैं। उनके अनुसार, अगर किसी मामले में गंभीर और स्पष्ट सबूत मौजूद हैं, तो उस पर कार्रवाई न करना भविष्य में भारत को नैतिक रूप से कमजोर स्थिति में डाल सकता है।
जस्टिस मुरलीधर ने यह भी अपील की कि जो देश को इस्राईल को हथियार सप्लाई करते हैं, उन्हें ऐसा करना बंद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत भी उन देशों में शामिल है जो ऐसे देशों को हथियार उपलब्ध कराते हैं, इसलिए इस पर भी पुनर्विचार जरूरी है।
उन्होंने आगे चेतावनी दी कि यदि स्पष्ट सबूतों के बावजूद कार्रवाई नहीं की जाती, तो आने वाले समय में देशों के लिए खुद को सही ठहराना मुश्किल हो सकता है।
अपने बयान में उन्होंने कुलभूषण जाधव मामले का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को गिरफ्तार किया था और उन्हें निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिली थी, तब भारत ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) का रुख किया था। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून को केवल “विदेशी” कहकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उसे गंभीरता से लेना चाहिए।

