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थाईलैंड में यूनुस ने पीएम मोदी से मुलाक़ात में शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाया

थाईलैंड में यूनुस ने पीएम मोदी से मुलाक़ात में शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाया

एक तरफ़ बिम्सटेक शिखर सम्मेलन की चकाचौंध, दूसरी तरफ़ कूटनीति का तनाव भरा खेल! जब बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने थाईलैंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाया, तो यह मुलाकात सिर्फ़ औपचारिकता नहीं थी, यह एक सियासी दांव का मंच बन गई। मोहम्मद यूनुस ने थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की।

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैठक के दौरान मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भारत के सामने उठाया है। मोहम्मद यूनुस और पीएम मोदी की बैठक के बारे में पूछे जाने पर बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने दोनों नेताओं के बीच की इस बैठक को “बहुत उपयोगी और रचनात्मक” बताया है।

शफीकुल आलम ने कहा है कि “हमने भारत के साथ आपसी हितों के सभी मामलों पर चर्चा की है।” बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि “मुख्य सलाहकार ने बांग्लादेश के लिए महत्वपूर्ण सभी मुद्दों को उठाया। चर्चा में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण, भारत में रहते हुए उनकी तरफ से दिए जाने वाले भड़काऊ बयान, सीमा पर हत्याओं का मुद्दा, गंगा जल संधि का नवीनीकरण और लंबे समय से लंबित तीस्ता संधि पर चर्चा की गई।” उन्होंने आगे कहा कि “दोनों शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत सकारात्मक और उत्पादक रही।”

पिछले साल अगस्त में छात्र आंदोलन के बाद सत्ता से बेदखल होने के बाद से भारत में शरण लिए शेख हसीना के प्रत्यर्पन की मांग बांग्लादेश लगातार कर रहा है। यह वही हसीना हैं, जो कभी भारत की क़रीबी सहयोगी थीं और अब भारत में शरण लिए हुए हैं। तो सवाल है कि यूनुस ने इस साहसिक कदम से क्या संदेश देना चाहा? क्या यह भारत को चुनौती थी, अपनी जनता को आश्वासन था, या फिर दोनों देशों के बीच तनाव को नई ऊंचाई देने की कोशिश?

हालांकि, शुक्रवार की द्विपक्षीय वार्ता से पहले मोहम्मद यूनुस और नरेंद्र मोदी ने गुरुवार शाम को बिम्सटेक नेताओं के सम्मान में आयोजित रात्रिभोज के दौरान छोटी बातचीत की थी। दोनों नेता एक-दूसरे के बगल में बैठे थे। इसके अलावा पिछले हफ्ते बीजिंग में मोहम्मद यूनुस ने भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर को लेकर आपत्तिजनक बयान दिए थे। उन्होंने चीन को सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आगे कारोबार का विस्तार करने का ऑफर दिया था, जिसपर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

दरअसल सिलीगुड़ी कॉरिडोर को भारत का “चिकन्स नेक” कहा जाता है। ये पश्चिम बंगाल में जमीन की एक संकरी पट्टी है, जो मुख्य भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ती है, जिससे यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और संपर्क के लिए रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण क्षेत्र बन जाता है। यह गलियारा पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग में स्थित है और एक प्वाइंट पर तो ये सिर्फ 22 किलोमीचर चौड़ा ही है।

एक डर हमेशा बना रहता है कि “चिकन्स नेक” पर हमला कर भारत को पूर्वोत्तर हिस्से से अलग किया जा सकता है। भारत के लिए “चिकन्स नेक” हमेशा से संवेदनशील रहा है और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस इसी की बात कर रहे थे।

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