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युवाओ को अहंकार और ग़लतफ़हमी का शिकार नहीं होना चाहिए: मोहन भागवत

युवाओ को अहंकार और ग़लतफ़हमी का शिकार नहीं होना चाहिए: मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद को संबोधित करते हुए युवाओं को सलाह दी कि वे इस ग़लतफ़हमी में न रहें कि हर चीज़ उनकी इच्छा के अनुसार होती है।

मोहन भागवत ने कहा कि सूर्य का अस्तित्व इस बात पर निर्भर नहीं करता कि कोई उसे स्वीकार करता है या नहीं। कोई व्यक्ति सूर्य को माने या न माने, वह अपने निर्धारित समय पर उगता और अस्त होता है। मनुष्य को ग़लतफ़हमी, घमंड और अहंकार से बचना चाहिए। किसी को यह भ्रम नहीं होना चाहिए कि, हर चीज़ उसकी इच्छा के अनुसार हो रही है और हर चीज़ पर उसका नियंत्रण है।

उन्होंने कहा कि, इस तरह की ग़लतफ़हमी और अहंकार के कारण इंसान खुद को बहुत महत्वपूर्ण समझने लगता है। मोहन भागवत ने कहा कि वास्तविकता इस तरह की सोच के विपरीत है और मनुष्य को इस भ्रम से बाहर निकलना चाहिए कि, हर काम उसकी इच्छा के अनुसार ही होता है।

मोहन भागवत ने कहा कि, धर्म के बारे में बोलना आसान नहीं है। इसके लिए पूरा जीवन भी लगा दिया जाए, तब भी धर्म की व्याख्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी।

उन्होंने एक घटना का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि एक धर्म विशेषज्ञ को धर्म के विषय पर भाषण देने के लिए आमंत्रित किया गया। वक्ता ने श्रोताओं से पूछा कि, धर्म को समझने के लिए उसकी मूलभूत जानकारी होना आवश्यक है और कितने लोग धर्म के बुनियादी सिद्धांतों से परिचित हैं। इस पर किसी भी श्रोता ने हाथ नहीं उठाया, क्योंकि सभी लोग धर्म के बारे में जानना चाहते थे।

धर्म विशेषज्ञ ने कहा कि जब किसी को धर्म की मूलभूत जानकारी ही नहीं है, तो वे इस विषय पर भाषण नहीं देंगे।

अगले दिन उन्हें उसी विषय पर दोबारा आमंत्रित किया गया। उन्होंने फिर श्रोताओं से धर्म के बारे में बुनियादी जानकारी होने के संबंध में सवाल किया। इस बार सभी श्रोताओं ने हाथ उठा दिए। इस पर वक्ता ने कहा कि जब सभी लोग धर्म के बारे में जानते हैं, तो फिर उनके भाषण की आवश्यकता ही क्या है।

तीसरे दिन जब उन्हें फिर से धर्म पर भाषण देने के लिए आमंत्रित किया गया, तो उन्होंने श्रोताओं से वही सवाल दोहराया। इस बार श्रोताओं में से आधे लोगों ने हाथ उठाया। इस पर वक्ता ने कहा कि जिन लोगों को धर्म के बारे में जानकारी है, वे बाकी लोगों को इसके बारे में बता दें। मोहन भागवत ने कहा कि धर्म के बारे में सही और वास्तविक जानकारी हासिल करना हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है।

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