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भोजशाला में बसंत पंचमी के दिन पूजा भी होगी और जुमे की नमाज भी होगी: सुप्रीम कोर्ट

भोजशाला में बसंत पंचमी के दिन पूजा भी होगी और जुमे की नमाज भी होगी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद स्थल पर शुक्रवार को बसंत पंचमी के दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने, जबकि मुसलमानों को उसी दिन दोपहर एक बजे से तीन बजे तक नमाज अदा करने की अनुमति दी है। साथ ही न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की सूची जिला प्रशासन को दी जाए। इसके लिए प्रशासन को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा उच्च न्यायालय ने मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी द्वारा दायर उस अपील का भी निस्तारण कर दिया, जिसमें परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण संबंधी मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के 11 मार्च 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी। उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि इस मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीशों में से किसी एक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ द्वारा की जाए।

यह देखते हुए कि एएसआई ने वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूरा कर लिया है और अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में उच्च न्यायालय को सौंप दी है, शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि वह रिपोर्ट को सार्वजनिक करे और संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराए, जो इस पर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। पीठ ने कहा कि आपत्तियां दर्ज की जाएं और उसके बाद मामले की अंतिम सुनवाई की जाएगी। इसने कहा, ‘‘जब तक याचिका पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, पक्षकार घटनास्थल पर यथास्थिति बनाए रखेंगे। हालांकि, पक्षकार एएसआई के अप्रैल 2023 के आदेश का पालन करना जारी रखेंगे।’’

दरअसल धार जिले में स्थित भोजशाला लंबे अरसे से विवाद में है। हिंदू समुदाय, भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित 11वीं शताब्दी का स्मारक है। एएसआई की ओर से सात अप्रैल 2003 को की गई एक व्यवस्था के तहत, हिंदू समुदाय के सदस्य मंगलवार को भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना करते हैं, जबकि मुसलमान शुक्रवार को परिसर में नमाज अदा करते हैं।

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