सरकार ने गोल्ड और सिल्वर पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी किया
प्रधानमंत्री मोदी की गोल्ड खरीद पर एक साल तक संयम बरतने की अपील के तीन दिन बाद केंद्र सरकार ने बड़ा आर्थिक फैसला लेते हुए सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार यह फैसला विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने और चालू खाता घाटा नियंत्रित करने के लिए लिया गया है। सरकार ने इसके पीछे मिडिल ईस्ट संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को वजह बताया है।
पहले सोने और चांदी पर 5 फीसदी बेसिक कस्टम ड्यूटी और 1 फीसदी एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस लगता था, यानी कुल 6 फीसदी शुल्क था। अब इसे बढ़ाकर 10 फीसदी बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 फीसदी सेस कर दिया गया है, जिससे कुल शुल्क 15 फीसदी हो गया है। जीएसटी जोड़ने पर प्रभावी टैक्स लगभग 18.4 फीसदी तक पहुंच गया है।
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना आयात करता है और इसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। वित्त वर्ष 2025-26 में गोल्ड आयात पर करीब 72 अरब डॉलर खर्च हुए। सरकार का मानना है कि आयात कम होने से 20 से 25 अरब डॉलर तक की विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है।
ड्यूटी बढ़ने का असर बाजार में तुरंत दिखाई दिया। एमसीएक्स पर सोना और चांदी 6 फीसदी से अधिक महंगे हो गए। 24 कैरेट सोना लगभग 15,475 रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच गया, जबकि चांदी की कीमत 2.8 लाख रुपये प्रति किलो के करीब पहुंच गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि महंगे दामों के कारण निवेश और शादी-ब्याह की खरीदारी प्रभावित हो सकती है। लोग गोल्ड ETF और डिजिटल गोल्ड की ओर रुख कर सकते हैं। वहीं ज्वेलर्स को ग्राहकों में कमी और कारोबार पर दबाव का डर है। उद्योग जगत ने यह भी चेतावनी दी है कि ज्यादा ड्यूटी से स्मगलिंग और ग्रे मार्केट फिर बढ़ सकते हैं।

