Site icon ISCPress

देश कानून के आधार पर चलता है, धर्म के आधार पर नहीं: मोहन भागवत

देश कानून के आधार पर चलता है, धर्म के आधार पर नहीं: मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख और सरसंघ चालक डॉक्टर मोहन भागवत ने हिंदुत्व और सेक्यूलरिज़्म को लेकर अपने स्पष्ट विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने कहा कि भारत का राज्य कानून के आधार पर चलता है, धर्म के आधार पर नहीं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि किसी भी धर्म विशेष को रोकने या बढ़ावा देने के बजाय, सरकार और समाज का संचालन नियम और कानून के अनुसार होना चाहिए।

इस दौरान उनसे यह पूछा गया कि सेक्यूलरिज़्म की सीमाओं के भीतर रहते हुए हिंदुओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है और युवाओं को हिंदुत्व के मूल्यों के अनुसार कैसे प्रशिक्षित किया जा सकता है। इस सवाल का जवाब देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि केवल धार्मिक रीतियों का पालन करना ही हिंदू होने की पहचान नहीं है। उनका मानना है कि असली धर्म व्यक्ति के व्यवहार और चरित्र में झलकता है। उन्होंने युवाओं को यह संदेश दिया कि मंदिर जाना या पूजा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जीवन में नैतिक मूल्यों और सही आचरण को अपनाना ही असली धर्म है।

आरएसएस के 100वें वर्षगांठ के अवसर पर कोलकाता के साइंस सिटी में आयोजित कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि देश की प्रगति और सामाजिक समरसता के लिए समाज का संगठित होना बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में हिंदू समाज को संगठित करने और उसके सामाजिक और नैतिक विकास के लिए प्रयास करना आरएसएस का उद्देश्य है।

सेक्यूलरिज़्म को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि सेक्यूलरिज़्म कोई पश्चिमी विचार नहीं है जिसे भारत पर ज़बरदस्ती थोप दिया गया हो। उनका कहना था कि यह केवल सरकार चलाने की एक नीति है, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करना और किसी भी धर्म के आधार पर भेदभाव न करना है। उन्होंने कहा कि सेक्यूलरिज़्म का मतलब धर्म विरोध नहीं है, बल्कि यह प्रशासन का एक तरीका है, जिससे देश का संचालन सुचारू और न्यायसंगत तरीके से हो सके।

इस पूरी बात से यह स्पष्ट होता है कि मोहन भागवत और आरएसएस का उद्देश्य मुस्लिम या किसी अन्य धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि समाज में नैतिक और व्यवस्थित विकास लाना और युवाओं को सही मार्गदर्शन देना है।

Exit mobile version