ISCPress

आरएसएस के कार्यक्रमों में हिस्सा न लेने लेने वाली पाबंदी सरकारी कर्मचारियों पर ख़त्म

आरएसएस के कार्यक्रमों में हिस्सा न लेने लेने वाली पाबंदी सरकारी कर्मचारियों पर ख़त्म

नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े सरकारी कर्मचारियों और इसकी गतिविधियों पर दशकों पुरानी पाबंदी हटा दी है। यह पाबंदी, जो 1966 से लागू थी, 9 जुलाई को औपचारिक रूप से हटा दी गई है, जिसकी पुष्टि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के हालिया आदेश से की गई है। 1966 में संगठन की गतिविधियों की प्रकृति को लेकर चिंता जताते हुए, केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत आरएसएस की गतिविधियों में हिस्सा लेने वाले सरकारी कर्मचारियों पर एक नई पाबंदी लगा दी गई थी।

कांग्रेस ने नाराज़गी जताई
पाबंदी हटाने के इस हालिया फैसले ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस आदेश को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए अपनी नापसंदगी जताई और इस कदम के समय पर सवाल उठाया। रमेश ने संकेत दिया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सदस्य और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में भी यह पाबंदी लागू रही। रमेश ने आगे कहा कि 4 जून, 2024 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस के बीच संबंध खराब हो गए हैं। 9 जुलाई 2024 को 58 साल पुरानी पाबंदी, जो वाजपेयी के प्रधानमंत्री के कार्यकाल में भी लागू थी, हटा दी गई।

बीजेपी ने इस कदम का स्वागत किया
बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा कि 1966 के मूल आदेश को असंवैधानिक बताते हुए इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “मोदी सरकार ने 58 साल पहले सरकारी कर्मचारियों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों में हिस्सा लेने पर पाबंदी लगाने वाले असंवैधानिक आदेश को वापस ले लिया है। मूल आदेश को पहले ही पारित नहीं किया जाना चाहिए था।”

इस फैसले ने विभिन्न राजनीतिक दलों और नागरिक समाज के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की हैं। जहां एक तरफ बीजेपी और आरएसएस समर्थक इसे एक सही कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल इसे लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के लिए खतरा मान रहे हैं। यह निर्णय सरकारी सेवा में काम करने वाले उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है जो आरएसएस की गतिविधियों में शामिल होना चाहते थे लेकिन पाबंदी के कारण नहीं हो सकते थे। यह पाबंदी हटने से अब उन्हें आरएसएस की गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इस फैसले का लंबी अवधि में सरकारी सेवा और राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखने वाली बात होगी।

Exit mobile version