सुष्मिता देव के खिलाफ जोरदार विरोध, विशेषाधिकार हनन का नोटिस
टीएमसी से बगावत करने के बाद भाजपा के टिकट पर दोबारा राज्यसभा के लिए चुनी गईं सुष्मिता देव को बुधवार को अपनी कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के कारण विरोध का सामना करना पड़ा। उन पर आरोप है कि उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के सांसद जॉन ब्रिटास को अपमानजनक अंदाज में “लुंगी वाला” कहा।
इस टिप्पणी के खिलाफ CPI ने सुष्मिता देव के विरुद्ध विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। विपक्ष के कई अन्य सांसदों ने भी इस मुद्दे पर उनका समर्थन किया। बुधवार को विपक्ष के जोरदार विरोध के कारण राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
जॉन ब्रिटास ने इस टिप्पणी को न केवल अपना अपमान बताया, बल्कि इसे दक्षिण भारत की संस्कृति और पहचान का अपमान भी करार दिया। उन्होंने भाजपा सांसद सुष्मिता देव के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव का नोटिस दिया।
यह विवाद 10 अगस्त को राज्यसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान हुई एक घटना से जुड़ा है। ब्रिटास का आरोप है कि जब वह सदन में भाषण दे रहे थे, तब सुष्मिता देव ने उन्हें “लुंगी वाला” कहकर टिप्पणी की। ब्रिटास के अनुसार, उस समय उन्होंने धोती पहन रखी थी।
ब्रिटास ने कहा कि उन्हें मलयाली और दक्षिण भारतीय होने पर गर्व है। उनका कहना है कि किसी सांसद को उसके पहनावे या क्षेत्रीय पहचान के आधार पर इस तरह अपमानजनक तरीके से संबोधित करना स्वीकार्य नहीं है।
बुधवार को राज्यसभा में यह मुद्दा उठाते हुए ब्रिटास ने कहा कि वह इस मामले को “बहुत दुख के साथ” उठा रहे हैं, क्योंकि यह केवल उनके व्यक्तिगत सम्मान का सवाल नहीं है, बल्कि संसद की गरिमा से भी जुड़ा हुआ मामला है।
बाद में मीडिया से बातचीत में ब्रिटास ने कहा कि “लुंगी वाला” ऐसा शब्द है, जो दक्षिण भारतीयों के बारे में एक रूढ़िवादी और अपमानजनक धारणा बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल लोगों को दूसरों से अलग दिखाने या उन्हें कमतर साबित करने के लिए किया जा सकता है।
विपक्ष ने इस मामले में सुष्मिता देव से स्पष्टीकरण और कार्रवाई की मांग की है। विवाद के कारण राज्यसभा की कार्यवाही भी प्रभावित हुई, जिससे यह मामला अब संसद की गरिमा, क्षेत्रीय पहचान और सांसदों के बीच सम्मानजनक व्यवहार से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में सामने आया है।

