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महाविकास अघाड़ी में फूट, एनसीपी ने अपने दम पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया

महाविकास अघाड़ी में फूट, एनसीपी ने अपने दम पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया

नगर निकाय चुनावों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के अंतिम दिन नागपुर में महाविकास अघाड़ी को बड़ा झटका लगा है। सीटों के बंटवारे को लेकर कई दौर की बातचीत के बाद यह स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) के बीच गठबंधन अंतिम चरण में टूट गया है। पूर्व गृहमंत्री और एनसीपी नेता अनिल देशमुख ने कांग्रेस पर धोखा देने का गंभीर आरोप लगाते हुए स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की घोषणा की है।

पिछले कई दिनों से नागपुर में कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे) और एनसीपी (शरद पवार) के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत चल रही थी। कांग्रेस के शहर अध्यक्ष विकास ठाकरे के साथ हुई बैठक में एनसीपी (शरद पवार) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) को संकेत दिया गया था कि कांग्रेस 12 से 15 सीटें छोड़ेगी। एनसीपी का दावा था कि सीटों का बंटवारा पिछले चुनावों में मिले वोट प्रतिशत और चुने गए पार्षदों के आधार पर किया जाएगा।

हालांकि, नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन कांग्रेस की अचानक अलग होने की घोषणा से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। इस अचानक बदलाव पर नाराज़गी जताते हुए अनिल देशमुख ने कहा कि पिछले चार-पांच दिनों से सकारात्मक बातचीत चल रही थी। कल रात तक सीटों की सूची को अंतिम रूप दे दिया गया था और दोनों दलों के नेताओं ने उस पर हस्ताक्षर भी कर दिए थे। लेकिन कांग्रेस ने अचानक और एकतरफा तरीके से रात तीन बजे गठबंधन तोड़ दिया। यह सब योजनाबद्ध ढंग से और जानबूझकर हमें मुश्किल में डालने के लिए किया गया है। कांग्रेस के इस फैसले से एनसीपी (शरद पवार) में भारी नाराज़गी है।

जैसे ही यह खबर सामने आई कि गठबंधन टूट गया है, पार्टी ने तुरंत इच्छुक उम्मीदवारों में ‘एबी’ फॉर्म वितरित किए और उन्हें अलग-अलग नामांकन भरने के निर्देश दिए। इस फूट ने न केवल एनसीपी बल्कि शिवसेना (उद्धव ठाकरे) और कांग्रेस के बीच के मैत्रीपूर्ण संबंधों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के साथ कांग्रेस का गठबंधन अब भी कायम है या नहीं।

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