Site icon ISCPress

‘धार्मिक कारणों से वंदे मातरम नहीं गाने पर आपराधिक कार्रवाई नहीं हो सकती: सुप्रीम कोर्ट

‘धार्मिक कारणों से वंदे मातरम नहीं गाने पर आपराधिक कार्रवाई नहीं हो सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वंदे मातरम् से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए यह जांचने पर सहमति जताई कि राष्ट्रीय गीत न गाने या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने को आपराधिक अपराध बनाया जा सकता है या नहीं। हालांकि, अदालत ने फिलहाल यह तय करने से इनकार कर दिया कि वंदे मातरम् का आधिकारिक गायन केवल दो अंतरों तक सीमित होना चाहिए या इसके सभी छह अंतरों का पाठ किया जाना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि धार्मिक कारणों से राष्ट्रीय गीत नहीं गाने वाले व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। यह टिप्पणी गायक टी.एम. कृष्णा की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आई। याचिका में वंदे मातरम् के गायन से जुड़े कानूनी प्रावधानों को चुनौती दी गई है

मामला उस कानून से संबंधित है, जिसके तहत वंदे मातरम् के गायन को रोकना या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालना दंडनीय प्रावधान के दायरे में आता है। हालांकि, अदालत के सामने यह सवाल भी है कि किसी व्यक्ति के धार्मिक विश्वास और राष्ट्रीय गीत के सम्मान से जुड़े कानूनी दायित्वों के बीच संतुलन किस तरह तय किया जाए

इस बीच, केंद्र सरकार ने वंदे मातरम् और राष्ट्रगान जन गण मन के गायन को लेकर आधिकारिक प्रोटोकॉल जारी किए हैं। गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, जब दोनों एक ही कार्यक्रम में गाए या बजाए जाएं, तो वंदे मातरम् पहले और जन गण मन उसके बाद होगा।

सरकार के आधिकारिक प्रोटोकॉल में वंदे मातरम् के छह अंतरों वाले संस्करण का उल्लेख किया गया है। गृह मंत्रालय ने सही शब्दों, लिपि, उच्चारण और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करने पर भी जोर दिया है।

यदि किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का अपना राज्य गीत भी हो, तो निर्धारित क्रम राज्य गीत, वंदे मातरम् और अंत में जन गण मन का है। सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा सुनवाई में अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वंदे मातरम् न गाने पर आपराधिक कार्रवाई की कानूनी सीमा क्या हो सकती है।

Exit mobile version