मुंबई पुलिस ने सीजेपी को शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया
मुंबई पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी के 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति देने से इनकार कर दिया है। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण को रोकने और अन्य चुनावी सुधारों की मांग को लेकर आयोजित किया जाना था। पुलिस के फैसले के बाद पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने गांधी जयंती के अवसर पर मुंबई में ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू करने का ऐलान किया है।
मुंबई पुलिस ने सोशल मीडिया पर जारी स्पष्टीकरण में कहा कि शिवाजी पार्क में किसी सभा को अनुमति देने का अधिकार उसके पास नहीं है। पुलिस ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 4 जनवरी 2013 के फैसले और महाराष्ट्र सरकार के 20 जनवरी 2026 के आदेश का हवाला दिया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के आवेदक अजिंक्य शिंदे को वैकल्पिक स्थान चुनकर वहां प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन करने की सलाह दी गई है।
पुलिस ने शिवाजी पार्क को शांत क्षेत्र बताते हुए कहा कि बड़े जमावड़े से ध्वनि प्रदूषण और भारी यातायात जाम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसके अलावा आसपास के अस्पतालों तक आपातकालीन वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने तथा स्कूलों के विद्यार्थियों और अन्य नागरिकों को परेशानी होने की आशंका भी जताई गई है। पुलिस ने यह भी कहा कि पार्क के इस्तेमाल के लिए जरूरी नगर निकाय की अनुमति आवेदन के साथ जमा नहीं की गई थी।
दिपके ने पुलिस के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रदर्शन की अनुमति से इनकार करना नागरिकों की आवाज दबाने के समान है। उन्होंने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा शिवाजी पार्क में कार्यक्रम को संबोधित करने का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि यदि वहां सभा की अनुमति देने का अधिकार पुलिस के पास नहीं है, तो पहले ऐसे कार्यक्रम कैसे आयोजित हुए। पुलिस ने इस संबंध में किसी विशेष पुराने कार्यक्रम पर अलग से टिप्पणी नहीं की है।
पार्टी ने इस आंदोलन को देशव्यापी अभियान की शुरुआत बताया है। उसकी प्रमुख मांगों में जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करना और 2023 के उस कानून में बदलाव करना भी शामिल है, जिसके तहत चुनाव आयोग की मौजूदा नियुक्ति और प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की गई है।

