लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पीएम मोदी जवाब के बिना पास
लोकसभा के बजट सत्र के सातवें दिन एक असाधारण संसदीय स्थिति देखने को मिली, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब के बिना ही पारित कर दिया गया। यह घटना वर्ष 2004 के बाद पहली बार हुई है, जब धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के भाषण के बिना पास हुआ। इससे पहले 10 जून 2004 को विपक्ष के भारी विरोध और हंगामे के चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह धन्यवाद प्रस्ताव पर बोल नहीं पाए थे।
बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देना था, लेकिन विपक्षी सांसदों की लगातार नारेबाजी और व्यवधान के कारण लोकसभा की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। बढ़ते हंगामे को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। इसके बाद उन्होंने 28 जनवरी को संसद के संयुक्त सत्र में दिए गए राष्ट्रपति के अभिभाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पढ़कर सुनाया, जिसे विपक्ष के शोर-शराबे के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
इस बीच राज्यसभा में भी राजनीतिक तनाव देखने को मिला। लोकसभा में राहुल गांधी को बोलने से रोके जाने के मुद्दे पर राज्यसभा में विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित किताब से जुड़े संदर्भ पर बोलने नहीं दिया गया। खड़गे ने कहा कि वे स्वयं उस किताब पर राज्यसभा में चर्चा करना चाहते हैं, लेकिन उपसभापति ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया।
इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने खड़गे से कहा कि राहुल गांधी संसदीय नियमों का पालन नहीं करते और उन्हें समझाने की जिम्मेदारी कांग्रेस नेतृत्व की है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि राज्यसभा में लोकसभा से जुड़े विषय नहीं उठाए जा सकते और कांग्रेस को “अबोध बालक” की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए।
लगातार हंगामे के बाद विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम करीब 5 बजे राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दे सकते हैं। यह घटनाक्रम संसद के मौजूदा सत्र में बढ़ते राजनीतिक टकराव और कार्यवाही में आ रही बाधाओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

