“मन की बात ” आम लोगों की मेहनत और सेवाभाव की सराहना का माध्यम: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों से प्रसारित हो रहा उनका मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ देश के आम लोगों की मेहनत, साहस, संकल्प, समर्पण और सेवाभाव को सम्मान देने का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। रविवार को कार्यक्रम की 139वीं कड़ी में उन्होंने कहा कि विजयादशमी के अवसर पर शुरू हुए इस सफर में देशवासी उनके सहयात्री और मार्गदर्शक रहे हैं। उनके अनुसार, यह कार्यक्रम देश के लोगों के योगदान को जानने और उनकी उपलब्धियों को नमन करने की तीर्थयात्रा के समान है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में अनेक ऐसे लोग हैं, जो असाधारण कार्य करते हैं, लेकिन आमतौर पर उनके प्रयासों पर समाज का ध्यान नहीं जाता। ‘मन की बात’ ने ऐसी प्रेरणादायक कहानियों को सामने लाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि श्रोताओं का अपनापन और प्रेम उनके लिए अनमोल पूंजी है। कई लोग संदेश भेजकर बताते हैं कि कार्यक्रम सुनते समय उन्हें लगता है, जैसे प्रधानमंत्री उनके परिवार के सदस्य बनकर उनसे बातचीत कर रहे हों।
प्रधानमंत्री ने ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान मिल रही है। उन्होंने त्योहारों के दौरान लोगों से स्थानीय कारीगरों के उत्पाद खरीदने की अपील की, ताकि उनकी मेहनत को प्रोत्साहन मिले और आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार हो सके।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि बिहार के पूर्णिया का मखाना ग्रीस और कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव तक पहुंच रही है। इससे भारतीय किसानों को विदेशी बाजारों में अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता के साथ आकर्षक पैकेजिंग को भी महत्वपूर्ण बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों द्वारा तैयार शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पादों की सराहना की। ‘शबरी नेचुरल्स’ की पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ मिलने का भी उल्लेख किया। इसके अलावा, कर्नाटक का एक स्टार्टअप बांस और कृषि अवशेषों से पैकेजिंग सामग्री तैयार कर रहा है। अंत में, प्रधानमंत्री ने खादी की बढ़ती लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए बताया कि गांधी जयंती पर एक ही दिन में खादी ग्रामोद्योग के उत्पादों की बिक्री 28 करोड़ रुपये से अधिक रही।

