राज्यसभा में भाषण के अंश हटाए जाने पर मल्लिकार्जुन खड़गे नाराज़
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में दिए गए अपने भाषण के कुछ हिस्सों को आधिकारिक रिकॉर्ड से हटाए जाने पर कड़ी नाराज़गी जताई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान उन्होंने जो भाषण दिया था, उसका एक बड़ा हिस्सा राज्यसभा की वेबसाइट से हटा दिया गया है, जबकि उन्होंने अपनी सारी बातें नियमों के दायरे में रहकर कही थीं।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में आपत्ति दर्ज कराते हुए मांग की कि हटाए गए हिस्सों को दोबारा रिकॉर्ड में शामिल किया जाए। उनका कहना था कि जिन अंशों को हटाया गया है, उनमें अधिकतर वे बिंदु शामिल थे जिनमें उन्होंने मौजूदा सरकार के कार्यकाल में संसदीय कामकाज की स्थिति पर टिप्पणी की थी और कुछ नीतियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की थी।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे उन नीतियों पर सवाल उठाएँ जिन्हें वे देश और जनता के हित के विरुद्ध मानते हैं। उन्होंने कहा कि उनका संसदीय जीवन पचास वर्षों से अधिक का है और वे सदन के नियमों और परंपराओं से भली-भांति परिचित हैं। उनके अनुसार, उनके भाषण में कोई भी ऐसा शब्द शामिल नहीं था जिसे असंसदीय या आपत्तिजनक कहा जा सके।
उन्होंने नियम 261 का हवाला देते हुए कहा कि इसका उपयोग केवल विशेष परिस्थितियों में किया जा सकता है, जबकि उनका भाषण उस श्रेणी में नहीं आता। इसके अलावा, संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत सदस्यों को सदन के भीतर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है। इसलिए भाषण के बड़े हिस्से को हटाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने चेयरमैन सी. पी. राधाकृष्णन से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें सदन के भीतर न्याय नहीं मिला तो वे जनता के सामने अपना पूरा भाषण रखने के लिए बाध्य होंगे।
इस पर चेयरमैन सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि चेयर को निर्देश देना उचित नहीं है और यह लोकतांत्रिक परंपरा के विरुद्ध है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी चेयरमैन का समर्थन करते हुए कहा कि नियम 261 का प्रयोग चेयरमैन का अधिकार है और इस पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।

