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इटली: सरकार की शिक्षा नीतियों के ख़िलाफ़ छात्रों का प्रदर्शन

इटली: सरकार की शिक्षा नीतियों के ख़िलाफ़ छात्रों का प्रदर्शन

इटली में सरकार की शिक्षा नीतियों के ख़िलाफ़ छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। शुक्रवार को देशभर में आयोजित ‘नो मेलोनी डे’ (No Meloni Day) के तहत छात्रों ने सरकार की शिक्षा नीतियों, जीवनयापन की बढ़ती लागत और सैन्य खर्च में हो रही वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन किए।

इतालवी दैनिक समाचार पत्र ला स्टाम्पा ने खबर दी कि शुक्रवार को देशभर में आयोजित ‘नो मेलोनी डे’ के दौरान छात्रों ने सरकार की शिक्षा नीतियों, बढ़ती महंगाई और सैन्य खर्च में वृद्धि के खिलाफ आवाज उठाई।

ये प्रदर्शन ट्यूरिन में कई दिनों तक स्कूलों पर क़ब्ज़े और झड़पों की घटनाओं के बाद हुए। वहां नक़ाबपोश युवाओं ने स्कूल की इमारतों को नुक़सान पहुंचाया, खिड़कियां तोड़ीं और आग बुझाने वाले उपकरणों (फायर एक्सटिंग्विशर) का इस्तेमाल किया। बाद में शहर में हुई घटनाओं के दौरान कम से कम एक शिक्षक, स्कूल के एक कर्मचारी और काराबिनियरी (इतालवी अर्धसैनिक पुलिस बल) के एक अधिकारी के घायल होने की खबर सामने आई।

अख़बार के मुताबिक़, क़ानून प्रवर्तन अधिकारियों के साथ कथित तौर पर प्रतिरोध करने के संदेह में 17 वर्षीय एक युवक को गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ गंभीर नुक़सान पहुंचाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया।

ये घटनाएं कई स्कूलों में हुईं, जिनमें सीला इंस्टीट्यूट और बोसो-मोंटी स्कूल शामिल हैं। हालांकि, जांचकर्ता इस बात की पड़ताल कर रहे थे कि क्या कुछ नक़ाबपोश युवक बाहरी व्यक्ति थे, जो छात्रों के विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए थे।

ट्यूरिन के मेयर स्टेफानो लो रूसो ने छात्रों के प्रदर्शन करने के अधिकार का समर्थन किया, लेकिन तोड़फोड़ की निंदा की। उन्होंने कहा, “प्रदर्शन करना और अपने विचारों का बचाव करना एक मौलिक अधिकार है, जिसका हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए और जिसकी रक्षा की जानी चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा कि हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना अस्वीकार्य है। इसके अलावा, शिक्षा मंत्री ज्यूसेप्पे वाल्दितारा ने भी तोड़फोड़ की निंदा की और कहा कि सरकार नुक़सान की भरपाई के लिए मुआवज़े की मांग करेगी।

ग़ौरतलब है कि, छात्रों के इस आंदोलन के तहत इटली के कई शहरों में स्कूलों पर कब्जा करने, हड़ताल करने और छात्र सभाएं आयोजित करने जैसी गतिविधियां शामिल हैं। आंदोलन के आयोजकों ने शिक्षा के लिए उपलब्ध कराए जा रहे धन, स्कूलों की स्थिति और सरकार की खर्च संबंधी प्राथमिकताओं को लेकर चिंता जताई है।

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