भारत ने इतिहास का सबसे बड़ा FTA साइन किया: पीएम मोदी
भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) आखिरकार संपन्न हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते की घोषणा करते हुए इसे “मदर ऑफ ऑल डील” बताया। उनका कहना है कि यह समझौता दुनिया की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच मजबूत और भरोसेमंद साझेदारी का प्रतीक है, जिससे भारत के उद्योग, ऊर्जा क्षेत्र और आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक 2026 को संबोधित करते हुए कहा कि भारत-EU FTA भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूती देगा और सर्विस सेक्टर को नया सहारा प्रदान करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच पिछले वर्ष हुए ट्रेड एग्रीमेंट को सपोर्ट करेगा, जिससे यूरोप के साथ भारत का कुल व्यापार और अधिक सशक्त होगा। सरकार के अनुसार, इस डील का उद्देश्य भारत और EU के बीच दो-तरफा व्यापार को बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना और रोजगार व तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा करना है।
गौरतलब है कि भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच यह समझौता पिछले 18 वर्षों से अटका हुआ था। अब यह “एग्रीमेंट इन प्रिंसिपल” के रूप में भारत की अब तक की सबसे बड़ी मार्केट ओपनिंग में से एक बन गया है। 26 जनवरी 2026 को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान हुई उच्च-स्तरीय बैठकों ने समझौते को अंतिम रूप देने में अहम भूमिका निभाई।
यह समझौता 140 करोड़ भारतीयों और यूरोपीय नागरिकों के लिए बड़े आर्थिक अवसर लेकर आया है। अनुमान है कि यह वैश्विक GDP के लगभग 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के करीब एक-तिहाई हिस्से को कवर करता है। हालांकि, भारत की कुछ ऐसी इंडस्ट्रीज जो अब तक ऊंचे टैरिफ के कारण सुरक्षित थीं, उन्हें बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंता है। ऐसे में ट्रांजिशन पीरियड और सेफगार्ड्स की मांग उठ सकती है।
इस डील से भारतीय कंपनियों को खासतौर पर ऑटो कंपोनेंट सेक्टर में बड़ा फायदा होगा। कार के पुर्जों पर लगने वाले टैरिफ को शून्य तक लाया जाएगा, जिससे भारत और यूरोप के बीच सप्लाई चेन का गहरा एकीकरण संभव होगा। एंटोनियो कोस्टा ने इस मौके पर कहा कि यूरोप-भारत संबंध उनके लिए सिर्फ आधिकारिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत भी हैं, क्योंकि उनका पारिवारिक संबंध गोवा से जुड़ा है। कुल मिलाकर, यह समझौता सिर्फ व्यापारिक डील नहीं, बल्कि भारत और यूरोप के बीच गहरे और दीर्घकालिक आर्थिक रिश्तों की मजबूत शुरुआत माना जा रहा है।

