“इंडियाा गठबंंधन” एकजुटता से करेगा वक़्फ़ बिल का विरोध
मोदी सरकार बुधवार 2 अप्रैल को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश करने वाली है। इसपर 8 घंटे तक लंबी चर्चा चलेगी, उसके बाद सरकार इस बिल को पारित कराएगी। इसको लेकर बीजेपी ने अपने सांसद के लिए व्हिप जारी किया है। वहीं कांग्रेस ने भी अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया।
केंद्र सरकार के इस बिल को ‘विभाजनकारी’ करार देते हुए विपक्ष ने एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया है। इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद गठबंधन की ओर से कहा गया कि पूरा इंडिया ब्लॉक कल वक्फ बिल के खिलाफ वोट देगा। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को लेकर विपक्ष ने एकजुट होकर कड़ा रुख अपनाया है।
विपक्षी दलों ने इसे असंवैधानिक और अल्पसंख्यक विरोधी करार दिया है। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने एकजुटता दिखाते हुए बड़ी बैठक की और संयुक्त रणनीति पर चर्चा की. बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल, समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव, NCP पवार गुट की नेता सुप्रिया सुले, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी और AAP के संजय सिंह शामिल हुए।
बैठक में DMK के टी आर बालू, तिरुचि शिवा और कनिमोई, RJD के मनोज कुमार झा, CPI-M के जॉन ब्रिटास, CPI के संदोष कुमार पी, आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन और वाइको भी उपस्थित थे।
लोकसभा में किसी भी बिल को पास कराने के लिए जरूरी आंकड़े 272 हैं। जबकि लोकसभा में सत्तारूढ़ बीजेपी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पक्ष में संख्याबल है। लोकसभा में 542 सदस्यों में NDA के 293 सांसद हैं, जिसमें बीजेपी के अपने 240 सांसद हैं। बीजेपी कई मौकों पर कुछ निर्दलीय सदस्यों का समर्थन हासिल करने में सफल रही है।
विपक्ष की बात करें, तो कांग्रेस के 99 सांसद हैं। जबकि इंडिया ब्लॉक के सांसदों को मिलाकर विपक्ष के पास 233 सांसद हैं।
इंडिया ब्लॉक की बैठक में कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि वे इस बिल का विरोध करेंगे। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, ‘यह बिल संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करता है। हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे।’
डीएमके सांसद कनिमोझी ने भी कहा, ‘हम धर्मनिरपेक्षता और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हैं। यह बिल अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश है।’