जीएसटी सुधारों से कारोबार आसान होगा, करदाताओं का भरोसा बढ़ेगा: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी सुधारों के अगले चरण का समर्थन करते हुए कहा है कि ‘अगली पीढ़ी’ के जीएसटी सुधार कर प्रणाली को और सरल तथा अनुमान योग्य बनाएंगे। इससे कर अनुपालन आसान होगा, रिफंड प्रक्रिया में सुधार आएगा और व्यापारियों को निवेश तथा कारोबार के विस्तार के लिए अधिक विश्वास मिलेगा।
जीएसटी परिषद की बैठक 7 अक्टूबर को प्रस्तावित है, जिसमें अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में सुधारों के अगले दौर पर चर्चा होने की उम्मीद है। वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण की ‘एक्स’ पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार इन सुधारों को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य से जोड़कर देख रही है। उन्होंने कहा कि सुधारों से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, राजस्व को मजबूत करने और देशभर के कारोबारों के लिए नए अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी सुधारों का अगला चरण पहले किए गए बदलावों को आगे बढ़ाएगा और करदाताओं के लिए व्यवस्था को अधिक अनुकूल बनाने पर केंद्रित होगा। इसमें पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने, रिफंड, विवादों के समाधान और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से जुड़े अनुपालन को सरल बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य कर अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को कम करना तथा कर प्रणाली को अधिक भरोसेमंद बनाना है।
इससे पहले जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक के फैसलों के तहत 22 सितंबर 2025 से जीएसटी ढांचे में बड़े बदलाव लागू किए गए थे। अधिकांश वस्तुओं को 5 और 18 प्रतिशत की कर दरों के दायरे में लाया गया था और 28 प्रतिशत का मुआवजा उपकर समाप्त किया गया था।
1 जुलाई 2017 को लागू जीएसटी ने केंद्र और राज्यों के कई अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत कर देश में साझा राष्ट्रीय बाजार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जीएसटी के तहत पंजीकृत करदाताओं की संख्या 2017 में लगभग 66.5 लाख से बढ़कर मई 2026 में 1.65 करोड़ हो गई।
आगामी बैठक में जीएसटी कानून के तहत कुछ अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने और प्रवर्तन संबंधी प्रावधानों में बदलाव पर भी चर्चा हो सकती है। इनमें सीजीएसटी अधिनियम की धारा 69 के तहत गिरफ्तारी के स्वतंत्र अधिकार को हटाने का प्रस्ताव शामिल है। वर्तमान में इस प्रावधान का इस्तेमाल फर्जी चालान, फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने या उसका दुरुपयोग करने जैसे गंभीर मामलों में किया जाता है।

