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तेल और गैस के बीच अंतर करने में दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं: एस. जयशंकर

तेल और गैस के बीच अंतर करने में दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं: एस. जयशंकर

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने प्रतिबंधों और प्रमुख समुद्री मार्गों के जरिए वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति में पैदा होने वाली बाधाओं पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ऊर्जा व्यापार और बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर किए जाने वाले हमले दरअसल ऊर्जा की कीमतों को बंधक बनाने की एक सोची-समझी रणनीति हैं।

शुक्रवार, 30 अक्टूबर को अटलांटा में जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान जयशंकर ने ये टिप्पणियां ऐसे समय में कीं, जब ईरानी तेल की बिक्री पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं, पश्चिम एशिया से ऊर्जा आपूर्ति में बाधाएं आ रही हैं और रूसी डीजल की बिक्री पर लगे प्रतिबंध हटाने का फैसला भी किया गया है। विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया जिस ऊर्जा संकट का सामना कर रही है, वह उत्पादन की कमी का संकट नहीं है, बल्कि अनिश्चितता, आपूर्ति में बाधाओं, अत्यधिक लागत और ऊर्जा तक पहुंच से जुड़ी चुनौतियों का संकट है।

जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऊर्जा व्यापार और बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर किए जाने वाले हमले ऊर्जा की कीमतों को बंधक बनाने की एक सुनियोजित रणनीति हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा बुलाई गई बैठक में जयशंकर ने कहा, “जी-20 को ऊर्जा बाजारों को खुला और स्थिर बनाए रखने के लिए समझदारी और नेतृत्व, दोनों का परिचय देना चाहिए।”

विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बाधाओं, प्रतिबंधों और ऊर्जा आपूर्ति के प्रमुख मार्गों यानी चोकपॉइंट्स के जरिए ऊर्जा बाजारों में लगातार अधिक विकृतियां पैदा की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं अब अधिक बार हो रही हैं, उनकी जटिलता बढ़ रही है और उनका प्रभाव भी व्यापक होता जा रहा है।

जयशंकर ने कहा कि इन परिस्थितियों में कम आय वाले देशों की स्थिति और उनकी समस्याओं का बहुत कम ध्यान रखा जाता दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि तेल और गैस के बीच अंतर करने में दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने टिप्पणी की, “चुनिंदा रवैये के उदाहरण खुद अपनी कहानी बयां करते हैं।”

जयशंकर ने कहा कि उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि वैश्विक बाजार में एक जगह पैदा होने वाले व्यवधानों के दूरगामी प्रभावों और देशों के बीच परस्पर निर्भरता को कम करके नहीं आंकना चाहिए। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि भारत को अपनी स्वच्छ खाना पकाने की जरूरतों को पूरा करने के लिए एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) की विश्वसनीय और अनुमानित आपूर्ति की आवश्यकता है।

जयशंकर ने दोहराया कि महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत का राष्ट्रीय मिशन खनिजों की खोज से लेकर उनके पुनर्चक्रण तक के सभी पहलुओं को शामिल करता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने जी-20 महत्वपूर्ण खनिज चक्रीयता पहल (जी-20 क्रिटिकल मिनरल सर्कुलैरिटी इनिशिएटिव) का प्रस्ताव रखा है। विदेश मंत्री ने कहा कि जी-20 को वित्तपोषण और उन्नत ऊर्जा भंडारण प्रणालियों तक पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ छोटे मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टरों, हरित हाइड्रोजन और जैव ईंधन के विकास एवं उपयोग को भी प्रोत्साहित करना चाहिए।

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