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इस देश में सांप्रदायिक राजनीति का कोई स्थान नहीं है: पीके कुन्हालीकट्टी

इस देश में सांप्रदायिक राजनीति का कोई स्थान नहीं है: पीके कुन्हालीकट्टी

नई दिल्ली : इंडियंस यूनियन मुस्लिम लीग की सर्वोच्च स्तर की राजनीतिक सलाहकार समिति की प्रेस कांफ्रेंस कांस्टीट्यूशन क्लब नई दिल्ली में आयोजित की गई,जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पीके कुन्हालीकट्टी साहब, मुस्लिम लीग के संसद के चार सदस्य इसमें पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक ईटी मुहम्मद बशीर, अब्दुल समद समदानी, पीवी अब्दुल वहाब, नवाज ग़नी समेत देश भर से आए विशेष सलाहकार के सदस्य शामिल हुए।

इस समिति का दिल्ली आकर बैठक करने,और प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का उद्देश्य दिल्ली में पार्टी के लिए एक राष्ट्रीय मुख्यालय (हेड क्वार्टर) बनाने के लिए जगह निर्धारित करना है। इस बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं मुस्लिम पर्सनल लॉ के सक्रिय सदस्य जफर याब जिलानी के निधन पर शोक व्यक्त किया गया तथा उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की गई।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पीके कुन्हालीकट्टी ने कहा कि मुस्लिम लीग ने कर्नाटक में कांग्रेस की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.पार्टी के सभी बड़े नेताओं ने कर्नाटक जाकर कांग्रेस के समर्थनके लिए मुसलमानों से अपील की,ताकि किसी भी तरह मुसलमानों का वोट बंटने न पाए और एकतरफा कांग्रेस को वोट जाए। मुस्लिम लीग ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और अपने कार्यकर्ताओं को कर्नाटक के गांव-गांव में भेजा।

उन्होंने इस जीत के लिए कर्नाटक की जनता और कांग्रेस को बधाई दी और कहा कि इस जीत ने साबित कर दिया है कि सांप्रदायिक राजनीति का इस देश में कोई स्थान नहीं है.भाजपा इस देश को जिस रास्ते पर ले जाना चाहती है, वह अपने लक्ष्य में सफल नहीं होगी। दक्षिण भारतीयों ने पूरे देश की जनता को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि इस देश में कानून का राज चलेगा, संविधान का राज चलेगा,साम्प्रदायिक एजेंडा नहीं चलेगा।

उन्होंने आगे कहा कि पार्टी के प्लेटिनम जुबली समारोह का समापन कार्यक्रम दिल्ली के ताल कटोरा स्टेडियम में नवंबर में होगा, जिसमें देश भर के सभी धर्मनिरपेक्ष दलों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे.ठीक उसी तरह जैसे पिछले महीने चेन्नई में पार्टी की 75वीं वर्षगांठ थी। उन्होंने कहा कि भारत में कांग्रेस के बाद इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो 1948 में अपनी स्थापना के बाद से देश की संसद और विधानसभाओं में अपने सदस्यों को भेजती रही है।

बेशक यह संख्या दक्षिण भारत में ज्यादा और उत्तर भारत में कम है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यहां पार्टी सक्रिय नहीं है, बल्कि पार्टी पूरे देश के अल्पसंख्यकों और दलितों की समस्याओं और उनकी आवाज को देश भर में उठाने के लिए काम कर रही है। जहां भी दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियां हैं, पार्टी उसके कल्याण के लिए सक्रिय रूप से काम करती है।

इस मौके पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय सचिव खुर्रम अनीस उमर, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मौलाना निसार अहमद नक्शबंदी, सैयद नियाज अहमद राजा, यूथ लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष आसिफ अंसारी, यूथ लीग के राष्ट्रीय महासचिव शिबू मिरान, मुफ्ती फिरोजुद्दीन मजाहिरी, दिल्ली प्रदेश के मुहम्मद शाजो शामिल रहे.एमएसएफ के लिए महासचिव शेख फैसल हसन, अतीब अहमद खान, एमएसएफ के राष्ट्रीय महासचिव मुहम्मद आसिफ, मोइनुद्दीन अंसारी उपाध्यक्ष, नूरुल शम्स, मुहम्मद जाहिद उप कोषाध्यक्ष, मौलाना दीन मुहम्मद कासमी और कई अन्य लोग एमएसएफ के लिए उपस्थित थे।

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