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पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक होने के दावे को केंद्र ने किया ख़ारिज

पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक होने के दावे को केंद्र ने किया ख़ारिज

केंद्र सरकार ने कर्नाटक सरकार के उन दावों को ख़ारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि E20 ईंधन में इथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक है। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की ओर से आपूर्ति किया जा रहा E20 ईंधन निर्धारित मानकों के अनुरूप है।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कर्नाटक सरकार के इस दावे पर प्रतिक्रिया दी है। कर्नाटक सरकार ने दावा किया था कि राज्य के कुछ पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा 26 से 31 प्रतिशत तक पाई गई है। राज्य के विभाग ने अक्टूबर महीने में लिए गए नमूनों की प्रयोगशाला जांच के आधार पर यह दावा किया था।

मंत्रालय के अनुसार, देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लिए गए कुल 893 नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए। इनमें कर्नाटक के 56 नमूने भी शामिल थे। जांच में कर्नाटक के सभी 56 नमूने IS 17021 मानक पर खरे उतरे और उनमें इथेनॉल की मात्रा 19 से 20 प्रतिशत के बीच पाई गई।

मंत्रालय ने कहा कि कर्नाटक में अक्टूबर महीने के दौरान की गई जांच में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) ने भी स्पष्ट किया है कि ये दावे निर्धारित कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाओं के अनुसार की गई जांच के निष्कर्षों से मेल नहीं खाते हैं।

मंत्रालय के मुताबिक, ‘मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (आपूर्ति एवं वितरण का विनियमन और अनियमितताओं की रोकथाम) आदेश’ तथा मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस में पेट्रोल के नमूने लेने, उन्हें सुरक्षित रखने, उनकी जांच करने और जांच के नतीजों की जानकारी देने के लिए स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

मंत्रालय ने बताया कि सितंबर महीने में लिए गए नमूने राज्य स्तरीय समन्वयक (State Level Coordinator) के माध्यम से निर्धारित तेल विपणन कंपनियों की प्रयोगशालाओं में भेजे गए थे, जहां आवश्यक मानकों के अनुसार उनकी जांच की गई थी।

इसके विपरीत, अक्टूबर महीने में नमूने लेते समय तेल विपणन कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद नहीं थे। तेल कंपनियों ने राज्य स्तरीय समन्वयक से संपर्क कर इन नमूनों, संबंधित पेट्रोल पंपों की जानकारी और प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन उन्हें ये जानकारियां उपलब्ध नहीं कराई गईं।

मंत्रालय ने बताया कि तेल विपणन कंपनियों का यह भी कहना है कि जांच के नतीजे निर्धारित नियंत्रण आदेश के तहत मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में की गई जांच के बजाय किसी तीसरी पार्टी की प्रयोगशाला द्वारा जारी प्रमाणपत्रों पर आधारित हैं।

कंपनियों के अनुसार, इन प्रमाणपत्रों में पर्याप्त तकनीकी जानकारी उपलब्ध नहीं है, जिसके आधार पर इथेनॉल की बताई गई मात्रा की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सके। इसके अलावा, संबंधित नमूने और आवश्यक दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण तेल कंपनियों और संबंधित पेट्रोल पंप डीलरों को जांच के नतीजों की पुष्टि करने या दोबारा जांच कराने का अवसर भी नहीं मिला।

केंद्र सरकार ने जांच में इस्तेमाल की गई तकनीक और रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए हैं। मंत्रालय के अनुसार, गैस क्रोमैटोग्राफी (Gas Chromatography) परीक्षण में E20 ईंधन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।

इसके अलावा, कर्नाटक की रिपोर्ट में दर्ज ईंधन के घनत्व (Density) के आधार पर भी उसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठाए गए हैं। मंत्रालय का कहना है कि जांच की प्रक्रिया में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन नहीं किए जाने के कारण इथेनॉल की मात्रा को लेकर किए गए दावों की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा होता है।

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