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हुर्मुज के बाद बाबुल-मंदब बंद हुआ तो भारत समेत दुनिया पर पड़ेगा बुरा असर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब लाल सागर में भी समुद्री मार्ग बंद होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। अगर यह अहम समुद्री रास्ता प्रभावित होता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और भारत जैसे आयात-निर्यात पर निर्भर देशों पर पड़ सकता है।

सूत्रों के अनुसार, आशंका जताई जा रही है कि अगर अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाता है, तो यमन लाल सागर के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले बाबुल-मंदब जलडमरूमध्य को बाधित कर सकता हैं। यह जलमार्ग एशिया और यूरोप के बीच व्यापार का एक बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है।

बाबुल-मंदब दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। इसके बंद होने की स्थिति में एशिया से यूरोप जाने वाले जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप का लंबा रास्ता अपनाना पड़ सकता है। इससे यात्रा का समय कई दिनों तक बढ़ सकता है और ईंधन व परिवहन लागत में भारी इजाफा हो सकता है।

भारत के लिए लाल सागर और स्वेज नहर मार्ग बेहद अहम हैं। देश का बड़ा हिस्सा यूरोप, अफ्रीका और भूमध्यसागरीय देशों के साथ समुद्री व्यापार के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करता है।

अगर यह मार्ग बाधित होता है तो निर्यातकों की शिपिंग लागत बढ़ सकती है साथ ही पेट्रोलियम और कच्चे माल की कीमतों पर दबाव आ सकता है । इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स और अन्य आयातित सामान महंगे हो सकते हैं और वैश्विक महंगाई का असर भारतीय बाजार तक भी पहुंच सकता है।

लाल सागर पहले भी सुरक्षा संकट के कारण वैश्विक व्यापार के लिए चुनौती बन चुका है। समुद्री मार्ग में किसी भी बड़े व्यवधान से कंपनियों को वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़ते हैं, जिससे सामान पहुंचने में देरी और लागत दोनों बढ़ जाती हैं।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका-ईरान तनाव और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर टिकी हुई है। अगर हुर्मुज जलडमरूमध्य के बाद लाल सागर भी प्रभावित होता है, तो यह वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

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