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संयुक्त राष्ट्र ने SIR कार्यक्रम पर जताई चिंता, अल्पसंख्यकों के नाम हटाने के आरोप पर मांगा जवाब

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र (UN) के तीन विशेष दूतों ने भारत में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कार्यक्रम को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने भारत सरकार से इस प्रक्रिया के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। विशेष दूतों के अनुसार, उन्हें ऐसी शिकायतें मिली हैं कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूतों ने अपने पत्र में दावा किया है कि पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए, उनमें लगभग 95 प्रतिशत मुस्लिम थे, जबकि वहां मुस्लिम आबादी करीब 25 प्रतिशत है। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची की समीक्षा के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), वर्तनी संबंधी त्रुटियों और तथाकथित “लॉजिकल विसंगतियों” के आधार पर नाम हटाए गए, जिससे वैध दस्तावेज रखने वाले भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए।

विशेष दूतों ने कुछ भारतीय नेताओं, जिनमें केंद्रीय गृह मंत्री का भी उल्लेख किया गया है, के “Detect, Delete, Deport” (पहचानो, हटाओ, निर्वासित करो) जैसे बयानों पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि ऐसे बयान मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भेदभाव और नफरत को बढ़ावा दे सकते हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने भारत सरकार से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, धर्म और जाति के आधार पर अलग-अलग आंकड़े उपलब्ध कराने तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों, विशेष रूप से ICCPR (अंतरराष्ट्रीय नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर वाचा) और ICERD (नस्लीय भेदभाव उन्मूलन संबंधी अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन) के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

विशेष दूतों ने यह भी कहा है कि यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो ऐसी कार्रवाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकती है।

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