मायावती का कांग्रेस पर पलटवार, कहा उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन पर चल रही है कांग्रेस
जैसे जैसे उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं वैसे वैसे सियासी पार्टियों में आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी तेज़ी पकड़ रहा है, इस बार की लड़ाई कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के बीच बसपा में B के मतलब को लेकर है, कांग्रेस ने BSP पर कटाक्ष करते हुए बसपा में B का मतलब BJP बताया तो BSP की सुप्रीमो मायावती ने B को बहुजन और धार्मिक अल्पसंख्यक वर्ग से जोड़ दिया।
BSP की प्रमुख मायावती ने ट्वीट करते हुए कांग्रेस पर वार किया और कहा कि उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन पर चलने वाली कांग्रेस का BSP का मतलब B वाला बयान घोर आपत्तिजनक है जबकि BSP में B का मतलब बहुजन है जिसमें SC ST और OBC धार्मिक अल्पसंख्यक और अन्य उपेक्षित श्रेणी के लोग आते हैं जिनकी तादाद अधिक होने के कारण उन्हें बहुजन कहा जाता है
1. यूपी में भी आक्सीजन पर चल रही कांग्रेस का यह कहना कि बीएसपी के ‘बी‘ का मतलब ’बीजेपी’ है, घोर आपत्तिजनक जबकि बीएसपी के ‘बी‘ का अर्थ बहुजन है, जिसमें SCs, STs, OBCs. धार्मिक अल्पसंख्यक व अन्य उपेक्षित वर्ग के लोग आते हैं, जिनकी संख्या ज्यादा होने की वजह से वे बहुजन कहलाते हैं।
— Mayawati (@Mayawati) July 4, 2021
मायावती ने इसके साथ साथ कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कांग्रेस के C का मतलब बताया और कहा कि कांग्रेस के C का मतलब वास्तव में कनिंग पार्टी है, जिसने केन्द्र व राज्यों में अपने लंबे शासनकाल में बहुजन के वोटों से अपनी सरकार बनाने के बावजूद इन्हें लाचार व गुलाम बनाकर रखा, जिसके बाद ही BSP पार्टी को बनाना पड़ा, और तब उस समय BJP केन्द्र व राज्यों की सत्ता में कहीं नहीं थी।
मायावती ने उत्तरप्रदेश के सभी राजनितिक दलों पर हमला करते हुए अपने जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव नहीं लड़ने की वजह भी स्पष्ट की, कहा कि सर्वविदित है कि यूपी में कांग्रेस, सपा व बीजेपी की सरकार के चलते यहां कोई भी छोटा-बड़ा चुनाव स्वतंत्र व निष्पक्ष कभी नहीं हो सकता, ना ही इनसे इसकी किसी को कोई उम्मीद करनी चाहिए, जबकि BSP की सरकार के समय में यहा सभी छोटे-बड़े चुनाव स्वतंत्र व निष्पक्ष कराए गए।
चुनावों से पहले सभी राजनीतिक दल सत्ता विरोधी वोटों को अपने साथ लाने के लिए लगातार एक दूसरे पर हमला कर रहे हैं, जिस तरह से सपा हो या कांग्रेस जिस तरह से बसपा को बीजेपी से जोड़ कर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, उससे एक बात तो स्पष्ट है कि इन दोनों दलों की कोशिश अल्पसंख्यक वर्ग को बसपा से दूर करके अपने ख़ैमे में लाने की कोशिश है।