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भारत में बच्चों की हालत चिंताजनक, थाली से फल-सब्जी और मेवे गायब

नई दिल्ली : बच्चों के खान पान को लेकर देश के हालात चिंताजनक हो गये हैं उनकी थाली से फल सब्जी और मेवे गायब हो गए हैं। 185 देशों के अध्ययन में हुए खुलासा के अनुसार छोटे बच्चों को पर्याप्त पौष्टिक पौधा-आधारित भोजन नहीं मिल रहा है जिस कारण कुपोषण और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

दुनिया भर में बच्चों के खान-पान को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। BMJ ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, बच्चों की डाइट से फल, सब्जियां, दालें, बीन्स और मेवे जैसी पौष्टिक चीजें धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं। 185 देशों में किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि छोटे बच्चे रोजाना जरूरत के मुकाबले बहुत कम मात्रा में पौधा-आधारित पोषण ले रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में बच्चे औसतन प्रतिदिन केवल 2.8 सर्विंग पौष्टिक पौधा-आधारित खाद्य पदार्थ खा रहे हैं, जबकि स्वस्थ विकास के लिए इससे कहीं अधिक मात्रा की जरूरत होती है।

अध्ययन में भारत और पाकिस्तान की स्थिति को विशेष रूप से चिंताजनक बताया गया है। 2 साल से कम उम्र के बच्चों में पौष्टिक भोजन की खपत के मामले में दोनों देश सबसे निचले स्तर पर पाए गए। भारत में लगभग 0.54 सर्विंग प्रतिदिन जबकि पाकिस्तान में लगभग 0.41 सर्विंग प्रतिदिन है।

रिपोर्ट के अनुसार, इन देशों में छोटे बच्चों के भोजन में फल और बिना स्टार्च वाली सब्जियों की मात्रा बेहद कम है। इससे बच्चों को जरूरी विटामिन, खनिज और फाइबर पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता

अध्ययन में यह भी सामने आया कि कई विकसित देशों में भी बच्चों की खाने की आदतों में बदलाव हो रहा है। अमेरिका जैसे अमीर देशों में बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते हैं, उनकी डाइट में फल और सब्जियों की मात्रा कम होती जाती है।

इसके बजाय बच्चों में जंक फूड, पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा चीनी वाले पेय पदार्थ, फास्ट फूड का सेवन बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली और आसानी से उपलब्ध अस्वास्थ्यकर भोजन बच्चों के पोषण पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं।

बचपन में सही पोषण नहीं मिलने का असर लंबे समय तक रह सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पौष्टिक भोजन की कमी से बच्चों में कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है, जिनमें कमजोर इम्यून सिस्टम, मोटापा, डायबिटीज का खतरा, हृदय संबंधी बीमारियां, शारीरिक विकास में कमी और मानसिक विकास से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं। बच्चों के शुरुआती वर्षों में मिलने वाला पोषण उनके शरीर और दिमाग के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों की डाइट में फल और सब्जियों की कमी के पीछे कई कारण हैं जिनमें परिवारों में खान-पान की बदलती आदतें, पौष्टिक भोजन की सीमित उपलब्धता, गरीबी और खाद्य असुरक्षा, फास्ट फूड और मीठे पेय पदार्थों का बढ़ता प्रभाव, माता-पिता में पोषण संबंधी जागरूकता की कमी मुख्य है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के भोजन में फल, हरी सब्जियां, दालें, अनाज, बीन्स और मेवे नियमित रूप से शामिल किए जाने चाहिए। खासकर शुरुआती उम्र में संतुलित आहार बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है।

BMJ ग्लोबल हेल्थ की यह रिपोर्ट दुनिया भर में बच्चों के बदलते खान-पान पर गंभीर सवाल उठाती है। भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में छोटे बच्चों के पोषण स्तर को सुधारना बड़ी चुनौती है। बच्चों की थाली में पौष्टिक भोजन की वापसी ही उनके स्वस्थ भविष्य की नींव बन सकती है।

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