इस्लामाबाद: भारत की परमाणु क्षमता को लेकर जारी SIPRI (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) की रिपोर्ट पाकिस्तान में चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। रिपोर्ट में भारत की परमाणु क्षमता और कथित रूप से 12 परमाणु वारहेड तैनात किए जाने का उल्लेख होने के बाद पाकिस्तान के रणनीतिक और कूटनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
इसी मुद्दे पर पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने कहा कि SIPRI की रिपोर्ट को पूरी तरह सही या पूरी तरह गलत नहीं कहा जा सकता। उनके मुताबिक, पाकिस्तान इस रिपोर्ट को गंभीरता से ले रहा है और भारत की परमाणु रणनीति का गहराई से आकलन कर रहा है।
एक टीवी कार्यक्रम में बातचीत के दौरान अब्दुल बासित ने कहा कि SIPRI के अनुमान के अनुसार भारत के पास लगभग 190 परमाणु वारहेड हैं, जबकि पाकिस्तान के पास करीब 170 हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के वास्तविक परमाणु हथियारों की संख्या सार्वजनिक नहीं होती, इसलिए ऐसी रिपोर्टें उपलब्ध सूचनाओं और विश्लेषण के आधार पर तैयार की जाती हैं।
उन्होंने कहा कि वास्तविक संख्या रिपोर्ट में बताए गए आंकड़ों से अलग हो सकती है, क्योंकि परमाणु कार्यक्रमों से जुड़ी जानकारी आमतौर पर गोपनीय रखी जाती है।
अब्दुल बासित ने कहा कि यदि भारत ने वास्तव में 12 परमाणु वारहेड तैनात किए हैं, जैसा कि रिपोर्ट में दावा किया गया है, तो यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जाएगा। उनके अनुसार, पहले यह धारणा थी कि भारत परमाणु हथियार विकसित तो कर रहा है, लेकिन उन्हें तत्काल इस्तेमाल की स्थिति में तैनात नहीं रखता।
उन्होंने कहा कि यदि वारहेड पहले से तैनात हैं, तो इससे भारत की परमाणु नीति और सैन्य तैयारियों को लेकर नए सवाल खड़े होते हैं।
पूर्व पाकिस्तानी राजनयिक का कहना था कि भारत की ऐसी क्षमता पाकिस्तान के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकती है। उनके अनुसार, इससे भारत अपनी प्रतिरोधक क्षमता (Deterrence) को मजबूत करने की कोशिश कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत ने इस विषय पर न तो आधिकारिक पुष्टि की है और न ही किसी तरह का खंडन किया है।
बासित ने कहा कि पाकिस्तान इस रिपोर्ट को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर सकता। उनके मुताबिक, देश की सुरक्षा एजेंसियां और संबंधित संस्थान भारत की परमाणु गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर स्थिति का मूल्यांकन कर रहे हैं।
SIPRI दुनिया के प्रमुख रक्षा और सुरक्षा शोध संस्थानों में से एक है, जो हर साल वैश्विक परमाणु हथियारों, सैन्य खर्च और सुरक्षा से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण प्रकाशित करता है। हालांकि संस्थान की रिपोर्टें सार्वजनिक स्रोतों और विशेषज्ञ आकलन पर आधारित होती हैं, इसलिए इन्हें किसी देश की आधिकारिक पुष्टि नहीं माना जाता।

