Site icon ISCPress

जयपुर, UCC के खिलाफ मुस्लिम संगठनों का विरोध, विधेयक वापस लेने की मांग

जयपुर : राजस्थान में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर विरोध तेज होता दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को जयपुर में मुस्लिम संगठनों ने प्रदर्शन कर राज्य सरकार से प्रस्तावित विधेयक पर पुनर्विचार करने और इसे वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन का नेतृत्व राजस्थान मुस्लिम फोरम ने किया, जिसमें बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं शामिल हुए।

शुक्रवार की नमाज के बाद मोती डूंगरी रोड स्थित मुस्लिम मुसाफिरखाना में प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर मार्च करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।

बाद में प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान तक जाने की अनुमति दी गई। वहां अधिकारियों ने उनका ज्ञापन लिया। ज्ञापन में सरकार से UCC विधेयक के प्रावधानों पर दोबारा विचार करने और इसे वापस लेने की मांग की गई।

यह विरोध ऐसे समय हुआ है जब राजस्थान की भाजपा सरकार ने विधानसभा में राजस्थान समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 पेश किया है। विपक्ष के हंगामे के बीच विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। अब पंचायत चुनावों के बाद नवंबर में विधेयक पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

राजस्थान मुस्लिम फोरम का कहना है कि प्रस्तावित कानून का असर मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े कई मामलों पर पड़ सकता है। फोरम ने यह भी सवाल उठाया कि जब अनुसूचित जनजातियों और कुछ अन्य समुदायों को कानून के दायरे से बाहर रखा गया है, तो इसे पूरी तरह समान कानून कैसे माना जा सकता है।

फोरम के सदस्य और अधिवक्ता सरवर आलम ने विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए दावा किया कि इसके कुछ प्रावधान संविधान द्वारा दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को प्रभावित कर सकते हैं।

प्रस्तावित UCC में विवाह के लिए अलग-अलग शर्तें तय की गई हैं। जीवित जीवनसाथी के रहते दूसरी शादी पर रोक का प्रावधान बताया गया है। विवाह की न्यूनतम आयु पुरुषों के लिए 21 और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है।

विधेयक में निकाह, सप्तपदी, आनंद कारज, पवित्र मिलन और मंगल फेरा जैसी विभिन्न धार्मिक एवं पारंपरिक विवाह पद्धतियों को भी मान्यता देने का प्रावधान बताया गया है।

प्रदर्शनकारी संगठनों ने अपने ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है और इसे सीधे अदालत के माध्यम से लागू नहीं कराया जा सकता।

संगठनों ने UCC के संभावित प्रभावों को लेकर समानता, गैर-भेदभाव, धार्मिक स्वतंत्रता, निजता और सांस्कृतिक अधिकारों से जुड़े सवाल भी उठाए हैं।

राजस्थान मुस्लिम फोरम ने सरकार से विधेयक पर व्यापक चर्चा और पुनर्विचार की मांग की है। साथ ही संकेत दिया है कि यदि सरकार विधेयक को आगे बढ़ाती है, तो आंदोलन को राजस्थान के दूसरे हिस्सों तक भी ले जाया जा सकता है।

Exit mobile version