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खेत की मिट्टी हो या जंग का मैदान आज भी खरे हैं किसान: राहुल गांधी

खेत की मिट्टी हो या जंग का मैदान आज भी खरे हैं किसान: राहुल गांधी, पिछले 6 महीनों से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन देश के अन्न दाता अभी भी अपनी मांगों को लेकर अपने घर से दूर धरने पर बैठे हैं।

आपको बता दें 6 महीने पहले जब से कृषि बिल लाया गया है तब से किसानों के सारे संगठनों ने उसका बॉयकॉट का ऐलान किया है और उसी समय से अलग अलग जगहों पर सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ आंदोलन जारी रखे हुए हैं।
ठंडक बीत गई, किसान ठिठुर कर रह गया लेकिन सरकार ने कोई सुनवाई नहीं की, गर्मी में तेज़ चिलचिलाती धूप में किसान तप रहा है फिर भी कोई सुनवाई नहीं और अब तो बारिश में किसान बैठा भीग रहा है लेकिन फिर भी सरकार से कोई उम्मीद नज़र नहीं आती।

केंद्र सरकार द्वारा कभी कहा गया किसान संगठनों से बातचीत जारी है जल्द ही हल हो जाएगा मामला, कभी देश के प्रधानमंत्री कहते हैं कि सरकार और किसानों के बीच केवल एक फ़ोन कॉल की दूरी लेकिन न उस बातचीत का हल निकला न ही वह फ़ोन कॉल आज तक हो पाया जिसका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज़िक्र किया था।

ऐसे में एक बात और ध्यान देने के क़ाबिल है कि सरकार क्यों अपने रवैये पर अड़ी है, एक तरफ़ सरकार का कहना है कि यह क़ानून किसानों के हित और फ़ायदे में हैं तो क्या देश के सारे किसान संगठनों और किसान आंदोलन से जुड़े नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को यह हित और फ़ायदा समझ में नहीं आ रहा? केवल सरकार ही इसे समझ पा रही है?!

किसान आंदोलन के मुखिया और किसानों के नेता राकेश टिकैत अपने इंटरव्यू और बयान में बार बार कह रहे हैं कि हम रोटी को शो रूम और लॉकर में नहीं जाने देंगे, यानी मोदी सरकार के इस क़ानून से फ़ायदा किसानों और मज़दूरों के बजाए सीधा पूंजीपतियों को होगा और इसी बात का किसान विरोध कर रहे हैं और इसी लिए पूरे देश का समर्थन भी किसानों को मिला हुआ है।

आज इस 6 महीने और 14 दिन के आंदोलन में 500 किसानों की जानें गई हैं जिसकी सरकार को बिल्कुल भी चिंता नहीं है, क्योंकि अगर किसानों की चिंता होती तो सरकार अब तक किसान संगठनों से बातचीत कर चुकी होती।
किसानों की लगातार मौतों को देखते हुए कांग्रेस पार्टी लगातार मोदी सरकार को निशाना बना रही है, इसी के चलते आज फिर कांगेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट के माध्यम से देश के लिए किसानों की भूमिका और बलिदान को बयान करते हुए लिखा:
खेत-देश की रक्षा में
तिल-तिल मरे हैं किसान
पर ना डरे हैं किसान
आज भी खरे हैं किसान।

और इसी के साथ उन्होंने अपने ट्वीट 500 किसानों की मौत का हैशटैग भी लगाया जिसके बाद सोशल मीडिया पर लगातार सरकार के अड़ियल रवैये की आलोचना फिर शुरू हो गई, ख़बर लिखे जाने तक 92 हज़ार से अधिक ट्वीट इस मामले पर हो चुके हैं।

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