किसी महिला का हिजाब हटाना उसकी स्वतंत्रता पर हमला है: सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पटना में एक समारोह के दौरान एक महिला डॉक्टर का हिजाब हटाने की कोशिश की निंदा करते हुए इसे महिलाओं की गरिमा, स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों पर गंभीर हमला बताया है। एसोसिएशन द्वारा इस संबंध में पारित प्रस्ताव में 15 दिसंबर को हुए इस घटना की कड़ी निंदा की गई है।
प्रस्ताव में कहा गया कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि एक उच्च संवैधानिक पद पर नियुक्त व्यक्ति ने सार्वजनिक मंच पर एक महिला की गरिमा और स्वतंत्रता को चोट पहुँचाने की कोशिश की। एससीबीए ने कहा कि महिला के हिजाब या सिर ढकने वाले वस्त्र को जबरदस्ती हटाना न केवल उसकी गरिमा का उल्लंघन है, बल्कि यह उसकी स्वतंत्रता, निर्णय लेने की आज़ादी और धार्मिक स्वतंत्रता पर भी सीधे हमला है। बार एसोसिएशन ने इस कार्य को महिलाओं के लिए ‘अपमानजनक’ करार देते हुए कहा कि यह मानसिक नीचता को दर्शाता है और इस तरह की घटनाएँ संविधान द्वारा सुरक्षित मूल्यों को चोट पहुँचाती हैं।
एससीबीए ने अपनी उक्त प्रस्ताव में केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिंह और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद के ‘असभ्य और उपहासपूर्ण’ बयानों की भी निंदा की। इसमें कहा गया कि इस तरह के बयान महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाते हैं और समाज में भेदभावपूर्ण सोच को बढ़ावा देते हैं। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने इस पूरे घटना को देश के संविधान में दर्ज समानता और गैर-भेदभाव के सिद्धांतों का उल्लंघन करार देते हुए दोषियों से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। एसोसिएशन ने महिलाओं की गरिमा, व्यक्तिगत अधिकारों और कानून की शासनशीलता के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
याद रहे कि 15 दिसंबर को पटना में एक समारोह के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों अपना सर्टिफिकेट लेने आई एक बुर्का पहनने वाली महिला का हिजाब नीतीश कुमार ने खींचने की कोशिश की थी और कहा था, “निकालो इसे।” उनके इस कृत्य के बाद दुनियाभर में उनकी आलोचना हुई थी। संविधान विशेषज्ञों ने इसे न केवल धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बल्कि महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन भी माना था। अब तक नीतीश कुमार ने इस पर कोई सफाई नहीं दी है।

