इराक के तेल मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि देश के ओपेक से बाहर निकलने की संभावनाओं को लेकर जो खबरें चल रही हैं, वे सरकार के आधिकारिक रुख को नहीं दर्शाती हैं।
बयान में कहा गया है कि इराक हमेशा इस बात पर जोर देता रहा है कि सदस्य देशों की वास्तविक और स्थायी उत्पादन क्षमता के आधार पर तेल उत्पादन की सीमा का पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
यह बयान तब आया जब समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने कुछ सूत्रों के हवाले से दावा किया था कि अगर OPEC इराक को तेल उत्पादन बढ़ाने की अनुमति नहीं देता, तो वह संगठन छोड़ सकता है।
एक वरिष्ठ इराकी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया था कि युद्धों के कारण देश आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, इसलिए इराक का उत्पादन कोटा बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इराक ने OPEC छोड़ने पर विचार किया है, लेकिन फिलहाल उसकी प्राथमिकता संगठन में रहकर अधिक कोटा हासिल करना है।
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और अन्य ओपेक सहयोगियों को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए, वरना इराक को सभी विकल्पों पर विचार करना पड़ेगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी ओपेक छोड़ना जल्दबाज़ी होगी।
इराक का जुलाई के लिए उत्पादन कोटा 4.378 मिलियन बैरल प्रतिदिन है, लेकिन हुर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के कारण वर्तमान उत्पादन इससे कम बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इराक ओपेक छोड़ता है, तो यह संगठन के लिए बड़ा झटका होगा। इराक ओपेक का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और 1960 में संगठन के संस्थापक सदस्यों में से एक है।

