ट्रंप का पुतिन के साथ डीज़ल ईंधन समझौता कमज़ोरी की निशानी है: कमला हैरिस
अमेरिका की पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डोनॉल्ड ट्रंप के डीज़ल ईंधन ख़रीदने संबंधी समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि, यह समझौता कमज़ोरी की निशानी है और इससे अमेरिका में आम लोगों के जीवन-यापन की लागत कम करने में भी कोई मदद नहीं मिलेगी।
ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति को बदलने की आवश्यकता जताई थी और अमेरिका में डीज़ल की बढ़ती कीमतों के लिए वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की को ज़िम्मेदार ठहराया था। कमला हैरिस ने ट्रंप के इसी हालिया बयान पर प्रतिक्रिया दी है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप की डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी रही हैरिस ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अमेरिका के अलोकप्रिय ईरान युद्ध का ज़िक्र करते हुए लिखा:
“डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के ख़िलाफ़ उनका युद्ध ही हमारे देश में डीज़ल और पेट्रोल की आसमान छूती कीमतों के लिए ज़िम्मेदार हैं। उनकी ताज़ा चाल, यानी अपने दोस्त व्लादिमीर पुतिन से ईंधन खरीदना, कमज़ोरी की बू देता है और रूस के युद्ध को वित्तीय मदद पहुँचाता है। लेकिन इससे अमेरिकी परिवारों पर जीवन-यापन की लागत का बढ़ता बोझ कम करने में कोई मदद नहीं मिलेगी।”
हैरिस ने आगे कहा,
अमेरिकी जनता ऐसे नेतृत्व की हक़दार है जिसे उनकी परवाह हो। वहीं, यूक्रेन की जनता भी ऐसे सहयोगियों की हक़दार है, जो एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और संप्रभु देश के लिए उनके संघर्ष में उनके साथ खड़े रहें।”
पूर्व विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने ट्रंप और पुतिन के बीच हुए समझौते को लूज़ बताया
इससे एक दिन पहले अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने भी डीज़ल की आपूर्ति के लिए ट्रंप और पुतिन के बीच हुए समझौते को अमेरिका और यूक्रेन, दोनों के लिए ‘ऐसी स्थिति जिसमें दोनों पक्षों को नुकसान हो’ (विन-विन के विपरीत, यानी लूज़-लूज़) बताया था। उन्होंने कहा था कि यह समझौता ईंधन की कीमतों को कम नहीं कर सकता।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को अपने रूसी समकक्ष के साथ हुए समझौते की घोषणा की थी। उन्होंने बताया कि रूस अमेरिका और वैश्विक बाज़ारों को 3 लाख टन से अधिक डीज़ल ईंधन उपलब्ध कराएगा। ट्रंप के दावे के अनुसार, रूस नवंबर में 3 लाख टन ईंधन की आपूर्ति करने के बाद बाज़ार में 5 लाख टन और उसके तुरंत बाद 10 लाख टन अतिरिक्त डीज़ल ईंधन उपलब्ध कराएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस समझौते का अमेरिका में डीज़ल की कीमतों पर सीमित प्रभाव पड़ने की संभावना है। उनके अनुसार, केवल इस समझौते के आधार पर ईंधन की कीमतों में स्थायी गिरावट आने की उम्मीद बहुत कम है।
इस समझौते के पूरी तरह लागू होने को लेकर भी संदेह है। राजनीतिक जोखिम विश्लेषक मैक्सिमिलियन हेस का मानना है कि इस समझौते का अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि यूक्रेन के रूसी तेल रिफ़ाइनरियों पर किए जा रहे हमलों के कारण रूस में डीज़ल ईंधन का उत्पादन सीमित हो गया है।

