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पुतिन ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की पश्चिमी देशों की कोशिशों की कड़ी आलोचना की

पुतिन ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की पश्चिमी देशों की कोशिशों की कड़ी आलोचना की

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की पश्चिमी देशों की कोशिशों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने प्रमुख गैस उत्पादक देशों से वैश्विक आपूर्ति शृंखला को स्थिर बनाए रखने के लिए आपसी ‘स्वैप ऑपरेशन’ यानी गैस की अदला-बदली के माध्यम से एकजुट होने का आह्वान किया।

रूसी राष्ट्रपति ने मंगलवार को मॉस्को में आयोजित गैस निर्यातक देशों के मंच (GECF) के आठवें शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। पुतिन ने सदस्य देशों से नाकेबंदी को दरकिनार करने तथा वैश्विक बाज़ारों को स्थिर रखने के लिए स्वतंत्र तंत्र स्थापित करने का आग्रह किया।

सम्मेलन में उपस्थित विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों को संबोधित करते हुए पुतिन ने भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक ऊर्जा परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था में उत्पन्न गंभीर व्यवधानों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और रूस के खिलाफ पश्चिमी देशों की आर्थिक लड़ाई का उल्लेख किया।

रूसी राष्ट्रपति ने महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बुनियादी ढाँचे को जानबूझकर निशाना बनाए जाने की ओर इशारा करते हुए कहा कि, यूरोप को गैस की आपूर्ति करने वाली रूसी पाइपलाइनों के खिलाफ ‘सीधे आतंकवादी कृत्य’ किए गए हैं।

उन्होंने कुछ पश्चिमी देशों की आलोचना करते हुए कहा कि वे ऊर्जा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले विशेष उपकरणों और प्रौद्योगिकियों की खरीद पर कृत्रिम बाधाएँ खड़ी कर रहे हैं। इससे वैश्विक गैस उद्योग अनिश्चितता की स्थिति में पहुँच गया है।

पुतिन ने कहा कि प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देशों को वैश्विक बाज़ार से बाहर करने की पश्चिमी देशों की कोशिशें उलटी पड़ गई हैं। इसके परिणामस्वरूप विदेशी उपभोक्ताओं को अत्यधिक कीमतें चुकानी पड़ रही हैं और यूरोपीय उद्योग को भारी नुकसान हो रहा है।

पुतिन ने कहा, “रूसी ऊर्जा संसाधनों को अस्वीकार करके और दीर्घकालिक अनुबंधों को तोड़कर यूरोप अपने ही उद्योग और सामाजिक क्षेत्र को नुकसान पहुँचा रहा है।”

यूरोपीय संघ की रणनीति पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने एक पारंपरिक रूसी कहावत का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “दूसरों के लिए गड्ढा मत खोदो, वरना खुद उसमें गिर जाओगे। मेरे विचार में, आज यूरोपीय संघ के देशों के साथ ठीक यही हुआ है।”

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