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अगर ईरान के तेल निर्यात और सुरक्षा की गारंटी नहीं तो किसी और की भी नहीं: क़ालीबाफ़

अगर ईरान के तेल निर्यात और सुरक्षा की गारंटी नहीं तो किसी और की भी नहीं: क़ालीबाफ़

ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर क़ालीबाफ़ ने चेतावनी दी है कि, जो देश ईरान के तेल निर्यात को रोकने और उसकी सुरक्षा को कमज़ोर करने की कोशिश करेंगे, उन्हें भी इसके जवाबी परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

मंगलवार को संसद के खुले सत्र को संबोधित करते हुए क़ालीबाफ़ ने कहा, “अमेरिकियों और दूसरे देशों को यह पता होना चाहिए कि जैसा हम पहले भी कह चुके हैं—जिस क्षेत्र में हम तेल नहीं बेचेंगे, वहां कोई और भी तेल नहीं बेचेगा। और अगर हमारी सुरक्षा की गारंटी नहीं होगी, तो किसी भी बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की गारंटी नहीं होगी।”

उन्होंने आगे कहा कि,

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हाल की टिप्पणियां, जिनमें उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य और इस रास्ते से जहाज़ों के आवागमन को लेकर अमेरिका के “नियंत्रण” की बात कही है, पहले दिए गए दावों की ही पुनरावृत्ति हैं। क़ालीबाफ़ ने इन दावों को निराधार बताया।

ख़बर के अनुसार, ईरान ने अमेरिका और इस्राइल की हालिया सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद कर दिया था। जून में पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए एक समझौता-ज्ञापन के तहत ईरान और अमेरिका ने जलडमरूमध्य को 60 दिनों के लिए फिर से खोलने पर सहमति जताई थी। लेकिन ख़बर के मुताबिक़, अमेरिका द्वारा समझौते के उल्लंघन के बाद ईरान ने फिर से इस मार्ग को बंद कर दिया।

ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए सात शर्तें रखी हैं

हाल ही में ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोसेन रज़ाई ने कहा था कि ईरान ने अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने के लिए अपनी शर्तें बता दी हैं। उन्होंने कहा कि, अगर वॉशिंगटन ईरान के साथ युद्ध से निकलना चाहता है, तो उसे तेहरान की शर्तों को स्वीकार करना होगा।

रज़ाई ने उन शर्तों का पूरा विवरण नहीं दिया। हालांकि, इससे पहले उन्होंने ईरान की कुछ शर्तों के रूप में सभी मोर्चों पर युद्ध रोकना, ईरान की ज़ब्त/जमी हुई संपत्तियों को जारी करना और ईरानी जहाज़ों तथा बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करना बताया था।

क़ालीबाफ़ ने कहा कि अगर अमेरिका ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी लागू करने, ईरान के हवाई मार्ग बंद करने या उसकी व्यापारिक गतिविधियों और आर्थिक संपर्कों पर दबाव डालने की कोशिश करता है, तो ईरान इसका जवाब देगा।

उन्होंने इसकी तुलना 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान दक्षिण-पश्चिमी ईरान के अबादान शहर की घेराबंदी तोड़े जाने से की। उन्होंने कहा, “अमेरिका की मौजूदा कोशिशों को भी गंभीर आर्थिक योजना और प्रबंधन तथा सैन्य जवाब के जरिए विफल किया जाएगा।”

क़ालीबाफ़ ने कहा कि इतने गौरवशाली और गहरी ऐतिहासिक जड़ों वाले राष्ट्र को घेराबंदी या धमकियों से डरना नहीं चाहिए। अगर अमेरिका का निर्णय लेने वाला तंत्र इस मूल वास्तविकता को समझने में नाकाम रहता है, तो वह लगातार ईरानी लोगों के “भारी प्रहार” झेलने के चक्र में फंसा रहेगा।

क़ालीबाफ़ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें वार्षिक सत्र में ट्रंप के हालिया भाषण का भी जिक्र किया। ख़बर के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि वह यह तय करने की स्थिति में हैं कि ईरान के साथ समझौता करना है या फिर उसके ख़िलाफ़ “तेजी से पूरी तरह नष्ट करने” की कार्रवाई करनी है। ट्रंप ने ईरान पर परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश करने का आरोप भी दोहराया।

क़ालीबाफ़ ने कहा कि, ट्रंप की “लापरवाह टिप्पणियों” और ईरानी राष्ट्र के प्रति उनके कथित अपमान से पता चलता है कि अमेरिका ने अभी तक अपना व्यवहार नहीं बदला है। “ऐसी उकसावे वाली बातों के जवाब में हमारा संदेश वही स्पष्ट संदेश है जो हम पहले भी दे चुके हैं: सामना करो।”

क़ालीबाफ़ ने आगे कहा कि “इस्लामी गणराज्य के ख़िलाफ़ किसी भी आक्रामक या दुस्साहसिक कार्रवाई का जवाब कड़ा, दर्दनाक, सटीक और तेज़ होगा।” उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन वह अपनी सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि कोई भी धमकी ईरानी राष्ट्र को पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।

क़ालीबाफ़ ने यह भी कहा कि “युद्ध अपराधियों और नरसंहार की भाषा को बढ़ावा देने वालों का अंजाम विनाश और हमेशा के लिए बदनामी के अलावा कुछ नहीं होगा।” उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के संयुक्त राष्ट्र महासभा में हालिया भाषण की भी प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने बाहरी दबाव के बीच ईरान की स्थिति को सही तरीके से सामने रखा।

अंत में, क़ालीबाफ़ ने ईरान के सामने मौजूद इस “ऐतिहासिक मोड़” का सामना करने के लिए साहसिक फैसले लेने, महत्वपूर्ण समय पर समय पर कार्रवाई करने और राष्ट्रीय एकता एवं एकजुटता को मज़बूत करने का आह्वान किया।

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