यूक्रेन का हाल बेहाल, रूस भी रुकने को नहीं तैयार

यूक्रेन का हाल बेहाल, रूस भी रुकने को नहीं तैयार

रूस और यूक्रेन के बीच जाए युद्ध बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। कहने को तो जंग रूस और यूक्रेन के बीच है लेकिन हक़ीक़त उस से अलग है जो नज़र आ रहा है। सच्चाई यही है कि यह युद्ध यूक्रेन और रूस के बीच है ही नहीं। जमीन पर लड़ाई छोड़कर नाटो पूरी शक्ति के साथ रूस से युद्ध कर रहा है।

रूस यूक्रेन युद्ध की खबरों के लिए पश्चिमी मीडिया पर आश्रित लोग अगर ऐसा समझते हैं तो उनका कोई दोष भी नहीं है। वह अगर इस युद्ध में रूस को हारता हुआ भी महसूस कर रहे हैं तो तब भी उन्हें समझा जा सकता है। जहां तक प्रोपेगैंडा युद्ध का सवाल है, रूस यूक्रेन में हार रहा है। पश्चिमी आक्रमण के नजरिये से वह भ्रम में पड़ गया है। लेकिन जमीन पर असली लड़ाई कुछ दूसरी है। जैसा कि पहले अनुमान किया गया था, रूस की चढ़ाई उतनी तेज नहीं है, पर वह अपने सभी लक्ष्य हासिल करता जा रहा है।

नाटो देशों, खास तौर से पोलैंड और अमेरिका के अधिकारी, राजनयिक और गुप्तचर यह वह लोग हैं जो यूक्रेन के लिए युद्ध लड़ रहे हैं। यूक्रेन के जनरल कमांड के पास रणनीतिक निर्णय लेने के लिए कुछ भी नहीं और तकनीकी मामलों में भी उनकी बहुत कम भागीदारी है। कोई गलती न कीजिए, यह यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध है ही नहीं, जमीन पर लड़ने के लिए यूक्रेन के सैनिक एवं जनता है, ज़मीन पर लड़ाई छोड़कर नाटो पूरी शक्ति के साथ रूस से युद्ध कर रहा है।

हालात यह है कि रूसी सशस्त्र बलों के ‘विशेष सैन्य ऑपरेशंस’ के पहले चरण की समाप्ति के बाद डॉनबास क्षेत्र से बाहर यूक्रेनी बल महज थल सेना बल के रूप में रहने लायक नष्ट कर दी गई है। अगर आप सैन्य रणनीति जानते हैं, तो आप समझ जाएंगे कि किसी सशस्त्र बल के साथ किया जाने वाला यह अत्यंत ही विध्वंसकारी हाल है।

यूक्रेन ने टैंक और हथियारबंद वाहनों समेत अपनी 85 प्रतिशत के करीब हथियारबंद यूनिटों को खो दिया है लेकिन यह आईएफवी (थल सेना युद्धक वाहन) और एपीसी (जवानों तथा हथियारों को ढोने वाले वाहन) तक सीमित नहीं हैं। इसकी वायु सेना नष्ट हो गई है और नौ सेना भी। इसके नुकसान का कम भी आकलन करें, तो युद्ध के दौरान इसके 20,000 सैनिक मारे जा चुके हैं जबकि 18,000 से अधिक इस हद तक घायल हुए हैं कि उन्हें तैनात नहीं किया जा सकता।

युद्ध शुरू हुआ तो कुछ भड़कीले वीडियो डाले गए जिसमें यूक्रेन के कुछ वायु रक्षा उपकरण और ड्रोन रूसी वायु संपत्तियों को बाहर भगा रहे हैं। ये उपकरण और ड्रोन काफी हद तक नष्ट कर दिए गए हैं। 200 से अधिक कमांड और कम्युनिकेशन सेंटर और राडार सेंटर भी नष्ट किए जा चुके हैं। छोटी रेंज वाले और लंबी रेंज वाले- दोनों किस्म के कुल 240 वायु रक्षा वाहन मिट्टी में मिला दिए गए हैं।

इसका मतलब है कि यूक्रेनी सेना भले ही बहुत बहादुरी से लड़ रही हो, किसी भी किस्म का आक्रमण कर पाने में अब सक्षम नहीं है। आक्रमणकारी फोर्स के तौर पर यह खत्म हो चुकी है। फिर भी, तीन वजहों से यह टिकी हुई है।

पहली, इसके 40 प्रतिशत मल्टिपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (एमएलआरएस) और तोपबंद फोर्स अब भी यूक्रेनी सेना के पास हैं। इन्हें इसने आबादी के बीच तैनात कर रखा है और समानांतर नागरिक नुकसानों के बिना इन्हें निकालना रूसियों के लिए असंभव है। शुरू से ही रूसी सशस्त्र सेनाएं अपने एक हाथ पीछे बांधकर इस युद्ध को लड़ रही हैं और यूक्रेन इसका पूरा लाभ उठा रहा है।

दूसरी वजह, नाटो देशों ने जितनी संख्या में हथियार, खास तौर से एंटी-टैंक मिसाइल और कंधे पर ढोए जा सकने वाले धरती से आकाश में मार करने वाली मिसाइल, उपलब्ध कराए हैं, वे बिल्कुल उन्मादी हैं। ये किसी भी सेना को भारतीय सशस्त्र बल के आकार तक बना देने को पर्याप्त हैं, यूक्रेनी सशस्त्र सेनाओं की तो बात ही छोड़ दीजिए।

तीसरी, इसके राजनीतिक वर्ग से अलग, नियो-नाजी एजोव बटालियन, राइट सेक्टॉर आदि समेत यूक्रेनी सशस्त्र सेनाएं छोटी-मोटी नहीं है। यह बहुत अच्छे-से प्रशिक्षित, हथियारों से बहुत अच्छे-से सज्जित, अभिप्रेरित है और रूसियों से बिल्कुल ही घृणा करती है। अगर आप अपने क्षेत्र से तुलना करना चाहें, तो यह उसी तरह है जैसे भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तानी सेना है। इसका मतलब है कि यूक्रेनी सेना मिट्टी में मिल जाएगी लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेगी।

 

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