यमनी बलों का सऊदी समर्थित लड़ाकों पर हवाई हमला
यमन में संघर्ष एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। मंगलवार तड़के देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में सऊदी और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) समर्थित यमनी बलों के ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ताज़ और हुदैदा प्रांत के तटीय इलाकों में कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
अरबी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, यमनी हूती बलों ने ताज़ प्रांत में स्थित रणनीतिक अल-मोखा बंदरगाह और उसके आसपास मौजूद सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अल-मोखा लाल सागर के तट पर स्थित एक महत्वपूर्ण बंदरगाह है और पश्चिमी यमन में सैन्य तथा समुद्री गतिविधियों के लिहाज से इसका रणनीतिक महत्व है। हाल के हफ्तों में भी यह इलाका हूती हमलों का केंद्र रहा है।
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि हुदैदा प्रांत के अल-ख़ोखा इलाके में सऊदी समर्थित लड़ाकों और यूएई समर्थित स्थानीय अर्धसैनिक बलों के ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ ड्रोन का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है।
अल-मोखा क्यों महत्वपूर्ण है?
अल-मोखा लाल सागर के किनारे स्थित होने के कारण यमन के संघर्ष में बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह इलाका बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के नजदीक है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए अहम मार्ग माना जाता है।
पिछले कुछ समय में हौथी बलों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थक बलों के बीच पश्चिमी तट पर तनाव बढ़ा है। अगस्त में भी अल-मोखा पर कई मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई थीं। एक हालिया हमले में कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की रिपोर्ट थी, जबकि यमनी सैन्य अधिकारियों ने कुछ मिसाइलों के समुद्र में गिरने की जानकारी दी थी।

