हमें इज़रायल के साथ समझौता स्वीकार नहीं, वर्तमान लेबनानी सरकार वैध नहीं: हिज़्बुल्लाह
लेबनान की संसद में “वफ़ादारी टू द रेज़िस्टेंस” (हिज़्बुल्लाह) संसदीय गुट के सदस्य हसन फ़ज़्लुल्लाह ने वॉशिंगटन में एक प्रारंभिक रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की खबर के बाद एक बार फिर इज़रायल के साथ किसी भी प्रत्यक्ष वार्ता का विरोध जताया।
उन्होंने इज़रायली प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा, “बेंजामिन नेतन्याहू को अपनी जनता के सामने जीत का ऐलान करने की जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए।”
फ़ज़्लुल्लाह ने कहा कि “नेतन्याहू वास्तव में स्वयं से ही बातचीत कर रहे थे, क्योंकि लेबनान की वर्तमान सरकार के पास न तो संवैधानिक और राष्ट्रीय वैधता है और न ही वह अपनी शर्तें लागू कराने की क्षमता रखती है।”
उन्होंने आगे कहा कि, वर्तमान लेबनानी सरकार वॉशिंगटन में हुए इस समझौते को तभी लागू कर सकती है, जब वह अमेरिका के समर्थन से देश को गृहयुद्ध की ओर धकेल दे।
फ़ज़्लुल्लाह ने चेतावनी दी, “हम इस सरकार को लेबनान को बर्बाद करने की अनुमति नहीं देंगे और अपने देश का भविष्य उसके हवाले नहीं करेंगे। निर्णायक शक्ति मैदान में होती है, और मैदान हमारे नियंत्रण में है। हम ही इस धरती के वास्तविक मालिक हैं।”
प्रारंभिक समझौते के बारे में नेतन्याहू के दावे
इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान के साथ प्रारंभिक समझौते की घोषणा के बाद इसे “इज़रायल की बड़ी उपलब्धि” बताया।
उन्होंने दावा किया कि इस समझौते के अनुसार हिज़्बुल्लाह के पूर्ण निरस्त्रीकरण (हथियार डालने) तक इज़रायली सेना सुरक्षा पट्टी (Security Belt) में बनी रहेगी।
नेतन्याहू ने इस प्रारंभिक समझौते को ईरान के लिए बड़ा झटका बताते हुए कहा कि तेहरान चाहता था कि इज़रायल दक्षिणी लेबनान से पीछे हट जाए।
उन्होंने यह भी दावा किया कि समझौते में स्पष्ट किया गया है कि लेबनान में ईरान और हिज़्बुल्लाह की कोई भूमिका नहीं होगी। अपने अन्य दावों में नेतन्याहू ने कहा, “हम लेबनानी सेना को दक्षिणी लेबनान के दो परीक्षण क्षेत्रों (Trial Zones) का नियंत्रण संभालने की अनुमति देंगे।”
उन्होंने बताया कि इन दो क्षेत्रों में से एक सुरक्षा पट्टी के बाहर स्थित होगा, जबकि दूसरा उससे अधिक विस्तृत क्षेत्र होगा।

