ट्रंप की मीडिया को धमकी: सिर्फ युद्ध की तारीफ करो, वरना सज़ा भुगतोगे
अमेरिका-ईरान में जारी युद्ध के तीसरे सप्ताह में हालात अब ऐसे मोड़ पर पहुँच गए हैं, जहाँ खुद राष्ट्रपति ट्रंप को अपने ही देश के मीडिया से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। शुरुआती दिनों में जिस युद्ध को तेज़ और निर्णायक बताया जा रहा था, वही अब लंबा खिंचता दिखाई दे रहा है, और इसके नतीजों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, युद्ध में बढ़ते नुकसान, भारी खर्च और स्पष्ट रणनीति की कमी को लेकर अमेरिकी पत्रकार लगातार सरकार से जवाब मांग रहे हैं। कई प्रमुख समाचार संस्थानों ने सरकार की नीतियों और फैसलों पर खुलकर सवाल उठाए हैं, जिससे ट्रंप प्रशासन दबाव में आ गया है।
इसी बढ़ते दबाव के बीच, ट्रंप ने कथित तौर पर मीडिया संस्थानों को चेतावनी दी है कि वे युद्ध से जुड़ी केवल सकारात्मक खबरें ही प्रसारित करें। सरकार का मानना है कि नकारात्मक रिपोर्टिंग से जनता का मनोबल गिरता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की छवि कमजोर होती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रशासन ने कुछ मीडिया संगठनों को संकेत दिया है कि यदि उन्होंने “राष्ट्रहित” के खिलाफ रिपोर्टिंग जारी रखी, तो उनके प्रसारण लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं या उन पर अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की आज़ादी पर सीधा हमला माना जा सकता है। कई पत्रकार संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने इस तरह की चेतावनियों की कड़ी निंदा की है और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या युद्ध के दबाव में अमेरिकी प्रशासन अपने ही लोकतांत्रिक सिद्धांतों से पीछे हट रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मीडिया और सरकार के बीच यह टकराव किस दिशा में जाता है और इसका असर युद्ध की स्थिति पर कितना पड़ता है।

